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आरपीएफ का दरोगा और तीन रेल कर्मी सस्पेंड

Wed, 29 Jun 2016 12:05 AM IST
बदायूं, ब्यूरो
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रेल पटरी बेचने का मामला:
रेल पटरियां बेचने के मामले में हुई कार्रवाई
रिपोर्ट जोन मुख्यालय गोरखपुर भेजी गई
 नीलामी के नाम पर रेल पटरियां बेच कर जेबें भरने वाले आरोपी आरपीएफ दरोगा पीएन तिवारी, रेलवे के पीडब्ल्यूआई डीसी श्रीवास्तव, स्टॉक वेरीफायर अख्तर कमाल, खलासी मंजू लाल शर्मा को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले में रिपोर्ट पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर मुख्यालय भेजी गई है। आरपीएफ के साथ विजिलेंस टीम को भी जांच में लगाया गया है। मामले में एक रेल कर्मी समेत तीन लोगों को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। दरोगा समेत चार लोग फरार चल रहे हैं। सभी के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी कर दिए गए हैं। 
पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल के कासगंज-बरेली रूप का पिछले साल ही अमान परिवर्तन हुआ था। मीटर गेज लाइन को हटाकर यहां ब्राडगेज लाइन डाली गई थी। उपयोग में न आने वाली मीटरगेज लाइन को आरपीएफ और रेल कर्मी मिलकर बेच रहे थे। बरेली-बदायूं रूट के मकरंदपुर स्टेशन पर पड़ी रेल पटरियां नीलाम करने के लिए पिछले दिनों टेंडर हुए थे। नीलामी में बरेली के मैसर्स पदमावती एसोसिएट ने 23.57 टन रेल पटरी खरीदी थी।
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यह रेल पटरी आरपीएफ के दरोगा पीएन तिवारी, रेलवे के पीडब्ल्यूआई डीसी श्रीवास्तव, स्टॉक वेरीफायर अख्तर कमाल, खलासी मंजू लाल शर्मा की देखरेख में ट्रक में लोड की गई। इन सभी ने 23.57 के स्थान पर 29 टन पटरी लोड करा दी। इस बारे में किसी ने रेल मंत्री सुरेश प्रभु को ट्वीट के जरिए जानकारी दे दी। रेलमंत्री के आदेश पर आरपीएफ कमांडेंट एसपीएस राठौर ने टीम के साथ छापामारी कर ट्रक पकड़ लिया। मामले में दरोगा पीएन तिवारी, रेलवे के पीडब्ल्यूआई डीसी श्रीवास्तव, स्टॉक वेरीफायर अख्तर कमाल, खलासी मंजू लाल शर्मा समेत ट्रक चालक सदाकत और क्लीनर सरफराज और पदमावती फर्म के मुंशी ऋषि के खिलाफ आरपीएफ, बदायूं में रिपोर्ट दर्ज की गई। खलासी मंजू लाल शर्मा समेत ट्रक चालक और क्लीनर को जेल भेजा जा चुका है। बाकी आरोपी फरार हैं। आरोपी दरोगा समेत अन्य रेल कर्मियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो चुका है। मंगलवार को इन सभी को सस्पेंड कर दिया गया। 
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आरपीएफ के दरोगा पीएन तिवारी, रेलवे के पीडब्ल्यूआई डीसी श्रीवास्तव, स्टॉक वेरीफायर अख्तर कमाल, खलासी मंजू लाल शर्मा को सस्पेंड कर दिया गया है। सभी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए गए हैं। रिपोर्ट गोरखपुर मुख्यालय भेज दी गई है।
-राजेंद्र सिंह, पीआरओ, इज्जतनगर रेल मंडल
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रेल मंत्री को किए ट्वीट से हुआ बड़ा खुलासा
निष्पक्ष जांच हो तो फंसेंगे कई बड़े रेल अफसर
 रेल मंत्री सुरेश प्रभु को किए गए एक ट्वीट ने रेलवे में बड़े भ्रष्टाचार से पर्दा उठा दिया है। जाहिर है कि रेल पटरियां बेच कर जेब भरने के मामले की निष्पक्ष जांच हो तो आरपीएफ और रेलवे के कई बड़े अफसरों की गर्दन फंस सकती है। अभी तो छोटी मछलियों के नाम सामने आए हैं, बढ़ी मछलियां जाल में फंसनी बाकी हैं। 
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रेलवे में कबाड़ के नाम पर पहले भी घोटाले होते रहे हैं। अमान परिवर्तन के दौरान कछला रेल पुल के गाटर में घपला हुआ था। इससे रेलवे को करीब 62 करोड़ रुपये की चपत लगी। इसके साथ अमान परिवर्तन के काम में भी देरी हुई। ताजा मामला कबाड़ हुईं रेल पटरियों की नीलामी का है। जाहिर है कि अगर इस मामले में रेल मंत्री तक जानकारी न पहुंचती तो रेलवे की संपत्ति को बेचने का धंधा चलता रहता। यह मामला सामने आने के बाद रेलवे में हड़कंप मचा हुआ है। इस हड़कंप की एक वजह यह भी है कि आरपीएफ और रेलवे के कई अफसरों की गर्दन भी फंस सकती है। 
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