सवारियों से भरी रोडवेज की कंडम बस सी सीढ़ी और फर्श अचानक झड़ गया। इससे कई सवारियां चलती बस से बाहर आ गईं। गनीमत रही कि कोई सवारी पहिए के नीचे नहीं आई। हादसे में दो लोग चुटैल जरूर हुए हैं। हादसा बुधवार दोपहर बरेली रोड पर मलगांव के पास हुआ। हाल ही में पीलीभीत के बंडा में चलती स्कूल बस का फर्श टूटने से एक नौ वर्षीय छात्र नीचे निकल पड़ा था। पहिए की चपेट में आकर छात्र की मौत हो गई थी। बदायूं डिपो ने इस घटना से कोई सबक नहीं लिया।
बदायूं डिपो की एक बस बुधवार सुबह बदायूं से बरेली के लिए चली थी। डिपो के टाइम ऑफिस से परिचालक महावीर सिंह और संविदा चालक नेतराम को भेजा गया। बदायूं से निकलने के बाद बस मलगांव के पास पहुंची थी। अचानक चलती बस का पायदान और फर्श टूट कर गिर गया। फर्श टूटने से कई सवारियां चलती बस से बाहर निकल पड़ीं। इससे सवारियों में हड़कंप मच गया। हादसा एक मोड़ के पास हुआ। गनीमत ये रही कि बस की रफ्तार धीमी थी। जाहिर है कि अगर यह कंडम बस तेज रफ्तार होती तो पहियों की चपेट में आकर कई सवारियों की जान जा सकती थी।
हादसे के समय बस में महिलाओं और बच्चों समेत 38 सवारियां थीं। पायदान और फर्श टूटने के बाद चालक ने बस रोकी। सवारियों ने जब कंडम बस पर ऐतराज किया तो बस चालक और परिचालक उनसे अभद्रता करने लगे। हादसे के बाद कई सवारियां दूसरे वाहनों से बरेली की ओर रवाना हो गईं। बाद में बस चालक ने बस का फर्श, पायदान और गेट सवारियों की मदद से बस की छत पर रखवाया और वह भी बरेली की ओर रवाना हो गया।
सड़क पर दौड़ रहीं डिपो की 16 कंडम बसें
बदायूं। परिवहन निगम के बदायूं डिपो के बेड़े में 100 निगम की और 25 अनुबंधित बसें हैं। निगम की 100 बसों में 16 बसें ऐसी हैं जो कंडम हो चुकी हैं। बावजूद इन बसों को सवारियां भर कर दौड़ाया जा रहा है। निगम की बस को आठ लाख किलोमीटर या छह साल पूरे होने पर कंडम घोषित कर बेड़े से हटा देने का प्रावधान है। इन नियमों का पालन बदायूं डिपो नहीं कर रहा। यहां इनकम के लिए यात्रियों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है।