चोरी से रेल पटरी बेचने का भंडाफोड़ होने के बाद आरपीएफ ने सात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। इनमें तीन रेल कर्मी भी शामिल हैं। आरपीएफ की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। रेलवे के बड़े अफसर मामले को दबाने में जुट गए हैं। पूरी कार्रवाई रेलमंत्री सुरेश प्रभु के आदेश पर हुई है। सूत्रों की मानें तो कुछ बड़े रेल अफसर भी लपेटे में आ सकते हैं।
इज्जत नगर रेल मंडल के कासगंज-बरेली रूट पर पिछले साल अमान परिवर्तन हुआ था। मीटर गेज लाइन को हटाकर यहां ब्राडगेज रेल लाइन चालू की गई है। उपयोग में न आने वाली मीटर गेट रेल पटरी को रेल अफसर और कर्मचारी धीरे-धीरे बेच रहे थे। पिछले दिनों रेलवे ने पटरी नीलामी के लिए ऑनलाइन टेंडर मांगे। बदायूं की मकरंदपुर रेलवे स्टेशन से 23.57 टन रेल पटरी नीलामी में बरेली के मैसर्स पदमावती एसोसिएट नाम की फर्म ने खरीद ली।
मकरंदपुर स्टेशन से 25 जून को यहां से पटरी ट्रक में लोड की गई। रेल कर्मचारियों और आरपीएफ के जवानों ने अपनी जेबें भरने के लिए ट्रक में 29 टन रेल पटरी लोड करा दी। पूरा मामला रेलमंत्री सुरेश प्रभु की जानकारी में आया। उनके आदेश पर आरपीएफ ने लोड ट्रक को पकड़ लिया। बदायूं रेलवे स्टेशन स्थित आरपीएफ थाने में इस मामले में तीन रेल कर्मियों समेत सात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा गई है।
वर्जन-
मामले में तीन आरापियों को जेल भेज दिया गया है। मामले की उच्चस्तरीय जांच चल रही है। इस बारे में हैं इससे ज्यादा नहीं बता सकता।
-दिनेश चंद्र शुक्ला, इंस्पेक्टर आरपीएफ