सात साल पहले 2010 में बदायूं संभागीय परिवहन कार्यालय से जारी किए गए 971 हैवी व्हीकल ड्राइविंग लाइसेंस जांच के घेरे में आ गए हैं। ये सारे डीएल जारी करने में जरूरी प्रमाणपत्रों को नहीं लगाया गया था। अधिकांश डीएल बिना मोटर ट्रेनिंग सर्टिफिकेट के जारी कर दिए गए। मामला संज्ञान में आने के बाद परिवहन विभाग मुख्यालय ने इन सभी लाइसेंसों की जांच के आदेश दिए हैं। इसके बाद एआरटीओ प्रशासन ने इन सभी 971 लाइसेंसों रिन्यूवल रोकने के साथ ही जांच शुरू कर दी है। इसका पता लगने पर डीएल धारकों में खलबली मच गई है।
साल 2010 में एक ही सीरीज में ये सभी 971 लाइसेंस संभागीय परिवहन कार्यालय से मानकों को अनदेखा करके आनन-फानन में जारी कर दिए गए थे। समझा जा रहा है कि यह अनदेखी उस वक्त कार्यरत रहे परिवहन अधिकारी, संबंधित लिपिकों ने दलालों की मिलीभगत से की थी। एआरटीओ प्रशासन नानक चंद्र शर्मा ने बताया कि नियमानुसार हैवी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए मोटर ट्रेनिंग संस्थान से हैवी वाहन चलाने में दक्षता का प्रमाण पत्र जरूरी होता है, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर डीएल बनवाते वक्त इसे नजर अंदाज किया गया। लगभग 15 दिन पहले मामला मुख्यालय पहुंचने के बाद संभागीय परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया। वहां से जांच के आदेश जारी किए गए। एआरटीओ प्रशासन नानक चंद्र शर्मा ने जांच के आदेश मिलते ही पूरी तरह से इन सभी हैवी लाइसेंसों के रिन्यूवल पर रोक लगा दी है। इस पर कई डीएल धारकों ने एतराज जताया, लेकिन उन्होंने साफ कह दिया कि जांच पूरी होने तक यह लाइसेंस रिन्यूवल नहीं होंगे।