अलापुर थाना क्षेत्र के गांव सलेमपुर में 25 अप्रैल 2011 को शिशुपाल की हत्या कर दी गई थी। मामले में नंदलाल और अहिवरन के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था। नंदलाल तब से जेल में ही है। मामले में सुनवाई कर रहे स्पेशल जज एससीएसटी एक्ट ने बुधवार को नंदलाल पुत्र छोटे लाल राजपूत को दोषी करार दिया था। गुरुवार को उसे सजा सुनाई जानी थी। कोर्ट परिसर स्थित कच्ची हवालात से नंदलाल को कोर्ट में लाया जा रहा था। इसी दौरान उसने जेब से एक डिब्बी निकाली और उसमें भरा पदार्थ निगल लिया। कोर्ट में पहुंचने के बाद नंदलाल की हालत बिगड़ने लगी। वह लड़खड़ा कर गिर गया। आननफानन में उसे पुलिस अभिरक्षा में जिला अस्पताल भेजा गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। इधर घटना के बाद कोर्ट ने नंदलाल की सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। सजा सुनाए जाने के लिए अभी कोई तारीख भी मुकर्रर नहीं की है।
जांच में किसी भी तरह के विषाक्त पदार्थ की पुष्टि नहीं हुई है। नशीला पदार्थ लेने की आशंका है। बंदी की हालत सामान्य है। उसके सैंपल भी लिए गए हैं। फिलहाल उसको अस्पताल में भर्ती कर लिया गया है।
-डॉ. एके गुप्ता, प्रभारी सीएमएस
बंदी की अभिरक्षा में लगे सिपाहियों ने बताया है कि कोर्ट रूम जाते वक्त उसने किसी पदार्थ का सेवन कर लिया था। बंदी विषाक्त पदार्थ की बात कह रहा है। इस मामले को दिखवाया जा रहा है। जो भी सच सामने आएगा, उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
-जेएस पाटनी, सीओ सिटी
आठ साल से चल रहा था खूनी खेल
बदायूं। करीब आठ साल पहले कादरचौक थाने के गांव चौड़ेरा निवासी अहिवरन की मां की हत्या कर दी गई थी। हत्या के इस मामले में शिशुपाल नामजद था। बाद में शिशुपाल सलेमपुर में रहने लगा था। 25 अप्रैल 2011 को शिशुपाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड में शिशुपाल के पुत्र मोर सिंह ने नंदलाल और अहिवरन को नामजद कराया था। खूनी खेल यही नहीं रुका। 13 मई 2015 को नंदलाल के भाई शान सिंह को गोली मार दी गई। इस मामले में मोर सिंह और रामवीर के खिलाफ कातिलाना हमले का मुकदमा दर्ज कराया गया था। हालांकि, नंदलाल के भाई उदय सिंह का आरोप है कि शिशुपाल की हत्या अहिवरन ने अपनी मां की हत्या का बदला लेने के लिए की थी।
बंदियों की सुरक्षा रहती है ताक पर
बदायूं। कोर्ट परिसर में सुरक्षा के तामझाम तो हैं, लेकिन वह दिखावे के नजर आते हैं। पुलिस कस्टडी के दौरान नंदलाल के पास विषाक्त पदार्थ कहां से आया? यह बड़ा सवाल है। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो कोर्ट परिसर स्थित कच्ची हवालात से कोर्ट रूम में जाते वक्त नंदलाल के किसी परिचित ने उसको चुपके से एक लोहे की डिब्बी दी थी। उसकी अभिरक्षा में लगे सिपाही कुछ समझ पाते, इससे पहले नंदलाल हलक से नीचे उतार लिया। बाद में ढ़ूढ़ने पर ये डिब्बी भी पुलिस को नहीं मिली।