गैंगरेप के आरोपी बर्खास्त सिपाही का मूसाझाग थाने में एकछत्र राज चलता था। दबंग सिपाहियों की टॉप सूची में शामिल वीरपाल के पास थाने के लॉकअप की एक चाबी भी रहती थी। मनमाने ढंग से ग्रामीणों को लॉकअप में बंद करके और वसूली के बाद इनको छोड़ना वीरपाल का पेशा बन गया था। राजनेताओं का करीबी होने की वजह से थाने के एसओ और हेडमोहर्रिर भी उससे कुछ नहीं कह पाते थे।
मूसाझाग थाने की हवालात थाने की पश्चिमी दिशा में अलग से बनी हुई है। नियम तो यह है कि हवालात की चाबी हेड मोहर्रिर के पास रहेगी लेकिन राजनेताओं की सरपरस्ती में नौकरी कर रहे दबंग सिपाही वीरपाल पर कोई नियम लागू नहीं होता था। थाने की हवालात को वीरपाल ने कई बार वसूली करने के लिए इस्तेमाल किया। दबंग सिपाही के जेल चले जाने के बाद इसके सताए तमाम लोग सामने आ रहे हैं। हालांकि यह लोग अपना नाम छपने से अब भी डरते हैं।
वीरपाल के सेंपल भी भेजे प्रयोगशाला
गैंगरेप के आरोपी बर्खास्त सिपाही वीरपाल यादव के सेंपल भी मंगलवार को जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ भेज दिए गए। पीड़िता और दूसरे आरोपी बर्खास्त सिपाही अवनीश यादव के सेंपल सात जनवरी को ही प्रयोगशाला भेज दिए गए।
कार से बरामद कपड़े सील किए
वीरपाल यादव की मारुति ए-स्टार कार से बरामद कपड़ों समेत कई चीजें सील कर दी गई हैं। मामले की विवेचना कर रहे एसओ मूसाझाग अशोक कुमार ने बताया कि कार से बरामद कपड़ों समेत सभी सामान को जांच के लिए भेजा जाएगा। वीरपाल की कार को पुलिस ने सोमवार को टूंडला से बरामद किया था।