गैंगरेप का आरोपी बर्खास्त सिपाही वीरपाल यादव एसटीएफ की लीक हो रहीं सूचनाओं के जरिए ही दस दिन तक पुलिस को चकमा देता रहा। पैंतरेबाज वीरपाल यादव की क्राइम ब्रांच और स्पेशल वेपंस एंड टैक्टिक्स टीम (स्वाट) में शामिल दो सिपाही मदद कर रहे थे। एसटीएफ वीरपाल की लोकेशन ट्रेस करते ही क्राइम ब्रांच और स्वाट को दे दी थी।
दोनों टीमों में शामिल भेदिए पुलिस की प्लानिंग लीक कर रहे थे। इसी आधार पर वीरपाल अपनी लोकेशन बदल रहा था। दोनों भेदियों के संबंध में एसटीएफ को भी जानकारी हो गई है। हालांकि अफसर इनकी हरकतों पर पर्दा डालने में जुटे हैं।
गैंगरेप के आरोपी सिपाही वीरपाल यादव और अवनीश यादव के खिलाफ एक जनवरी की रात साढ़े आठ बजे रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इससे पहले ही दोनों सिपाही फरार हो गए। दो जनवरी को एडीजी क्राइम एचसी अवस्थी, आईजी जोन विजय सिंह मीना और डीआईजी आरकेएस राठौर बदायूं पहुंचे थे। दोनों सिपाहियों को बर्खास्त कर दिया गया।
इनकी गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ, क्राइम ब्रांच टीमों के साथ पांच थानों के एसओ लगाए गए थे। पांच जनवरी को नाटकीय ढंग से अवनीश यादव को तो बरेली जंक्शन से गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन वीरपाल यादव की गिरफ्तारी में दस दिन लग गए। एसटीएफ ने कई बार वीरपाल यादव की लोकेशन ट्रेस करके स्वाट और क्राइम ब्रांच को दी।
इसी आधार पर इसकी गिरफ्तारी की प्लानिंग होती थी लेकिन इन टीमों के भेदिए पुलिस के पहुंचने से पहले वीरपाल तक सूचनाएं पहुंचा देते थे। इन्हीं सूचनाओं के जरिए पैंतरेबाज वीरपाल बच निकलने में कामयाब हो जाता था। एसटीएफ सूत्रों की मानें तो उनकी सूचनाएं लगातार लीक होने की वजह से ही वीरपाल दस दिन तक गिरफ्तारी से बचता रहा।
स्वाट टीम के सिपाही ने दिलाया था किराए पर मकान
स्वाट टीम के एक सिपाही ने ही वीरपाल यादव को पंडित जी पेट्रोल पंप के पास वाली गली में मकान किराए पर दिलाया था। वीरपाल का परिवार यहीं रहता था। जिस मकान में वीरपाल किराए पर रहता था वह मकान स्वाट टीम के इसी सिपाही के रिश्तेदार का है। गौर करने वाली बात यह है कि वीरपाल का करीबी यह सिपाही अरेस्टिंग टीम में शामिल था और अफसरों को खबर तक नहीं हुई।