न्यायालय अपर सेशन जज अहमद उल्ला ने मुल्जिम को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से झूठी गवाही देने के मामले में एसआई तथा सिपाही के खिलाफ मुकदमा कायम करने का हुक्म दिया है।
विस्तार से सुनाए गए फैसले में कोर्ट ने कहा कि कांस्टेबिल 596 ऋषिपाल भाटी फर्द बरामदगी के वक्त घटनास्थल पर मौजूद नहीं था। जबकि दूसरा चश्मदीद गवाह एसआई अशोक कुमार सिंह ने जिरह के दौरान प्रश्नों के जवाब में याद नहीं, ध्यान नहीं के रूप में दिया है। आश्चर्य की बात यह भी रही कि एसआई को घटना से जुड़ी किसी बात की जानकारी नहीं है। फैसले के मुताबिक दोनों चश्मदीद गवाह के बयानों से यह भी स्पष्ट होता है कि किसी अन्य मुकदमे में वांछित अभियुक्त पर अपनी कारगुजारी दिखाने के लिए उसे कहीं अन्यत्र से गिरफ्तार करके झूठा मुकदमा बनाकर कोर्ट में प्रस्तुत कर दिया। पुलिस को यह कृत्य धारा 344 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत अपराध है, जिसकी विवेचना होना न्याय संगत है। कोर्ट ने सिपाही ऋषिपाल भाटी एवं एसआई अशोक कुमार के विरुद्ध मुकदमा कायम कराने के आदेश दिए हैं। बता दें कि सहसवान क्षेत्र के गांव भवानीपुर खेड़ा निवासी सद्दन पर गैरकानूनी तौर पर 12 जून 2010 को तमंचा मय कारतूस की बरामदगी के आरोप के मुकदमे की सुनवाई अदालत में की गई। इस केस की गवाही में एसआई और सिपाही की गवाही हुई जो कि झूठी पाई गई। इसके चलते कोर्ट ने पुलिस के दोनों गवाहों पर अदालत में झूठी गवाही देने के आरोप में मुकदमा कायम कराने की हिदायत दी है। अभियुक्त की ओर से रोशनयासीन गुड्डू ने पैरवी की।