बुधवार सुबह थाना क्षेत्र के काजीखेड़ा गांव में दो पक्षों की रंजिश ने एक मासूम की जान ले ली। विपक्षी पर चलाई गई गोली चबूतरे पर खेल रहे सात साल के बच्चे को लगी और वह वहीं ढेर हो गया। घटना में उसके पिता ने पांच लोगों को नामजद कराकर रिपोर्ट दर्ज कराई है। गांव निवासी किसान अलबेले सिंह का सात साल का बेटा अर्पित बुधवार सुबह अपने चबूतरे पर खेल रहा था। इस दौरान गांव निवासी लज्जाराम और लज्जाराम का सौतेला भाई जितेंद्र आपस में झगड़ा करने लगे। बताते हैं कि लज्जाराम की मां ने अपने पति को छोड़कर जितेंद्र के पिता से शादी कर ली थी। कई बरस से दोनों पक्षों में विवाद चल रहा था। खेतिहर और आवासीय भूमि पर स्वामित्व को लेकर दोनों अड़े हुए थे। इनमें झगड़ा ज्यादा बढ़ा तो आसपास के लोग भी पहुंच गए। पहले लाठियां निकलीं और फिर लज्जाराम अपने घर से देशी रायफल ले आया। उसने जितेंद्र को निशाना बनाकर फायर किया। निशाना चूक गया और गोली चौपाल पर खेल रहे अर्पित को जा लगी। अर्पित की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद हड़कंप मच गया और आरोपी फरार हो गए। सूचना पर यूपी 100 और थाना पुलिस पहुंची। बच्चे के शव को पुलिस ने सील कराया। साथ ही संदिग्ध आरोपियों के घरों पर दबिश दी तो वे फरार हो गए। दोपहर बाद अलबेले ने बेटे की हत्या में लज्जाराम, उसके पिता जवाहर, भाई शीलेंद्र, साधु और काशीराम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। उधर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक गोली बच्चे की दोनों आंखों के बीच माथे में लगी थी। अलबेले मामूली जोत के किसान हैं और खेती व मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। उनके छह बेटियां हैं। बेटियों से छोटा अर्पित कभी कभार गांव के प्राइमरी स्कूल में पढ़ने जाता था। हालांकि उसका अभी दाखिला नहीं कराया गया था। अर्पित से छोटा उसका भाई सल्पित पांच साल का है। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
दरोगा ने कई बार बदलवाई तहरीर
मूसाझाग। अर्पित की हत्या के मामले में कई बार तहरीर बदलवाई गई। इसमें थाने में तैनात एक दरोगा की भूमिका रही। दरोगा ने पहले अर्पित के परिवार वालों को तहरीर लिखवाने थाने से बाहर भेजा, पीछे से खुद पहुंच गया और अपने हिसाब से तहरीर लिखवाने लगा। जब मौके पर भीड़ लगी तो दरोगा परिवार वालों को थाने के अंदर एक कमरे में ले गया। वहां गांव के एक युवक से तहरीर लिखवाकर पिता अलबेले से अंगूठा लगवाया और कमरे से बाहर कर दिया।