सूबे में मनरेगा की करोड़ों की रकम में घपले को लेकर मनरेगा का रिकार्ड भी सीबीआई के हवाले कर दिया गया है। मनरेगा के घोटालों की जांच में सीबीआई 40 लाख से अधिक की परियोजनाओं पर विशेष निगरानी रखे हुए है। गनीमत मानी जा रही है कि बदायूं में इतनी रकम की कोई परियोजना नहीं है। बदायूं में मनरेगा की सर्वाधिक धन व्यय की परियोजनाओं में बाढ़ खंड की है, जो मात्र 20 लाख रुपये के आसपास है। पिछले छह महीने से सीबीआई ग्राम विकास आयुक्त के जरिए मनरेगा के रिकार्ड संकलित कर रही है। सीबीआई के बदायूं मनरेगा में भी पत्र आए हैं। फिलहाल सीबीआई का फोकस 40 लाख से अधिक की परियोजना पर है। बदायूं में इतनी बड़ी कोई परियोजना न होने से मनरेगा में काम कर चुके अधिकारियों के लिए राहत की बात है।
प्रदेश मुख्यालय से हो रही सीबीआई जांच को लेकर यहां मनरेगा में खलबली तो है, लेकिन इस बात पर राहत महसूस की जा रही है कि जिले में 40 लाख या इससे अधिक रुपये की किसी परियोजना पर धन खर्च नहीं किया गया है। बाढ़ खंड ने सबसे बड़ी परियोजना पर धन व्यय किया था लेकिन यहां भी 20 लाख रुपये से अधिक की कोई परियोजना नहीं है। पिछले दिनों डीआरडीए के पीडी रामरक्षपाल सिंह यादव हाल ही में मनरेगा का रिकार्ड लखनऊ सौंपकर आए हैं। जहां सीबीआई इन रिकार्डों को खंगालेगी।
चार वर्षों के रिकार्ड की जांच कर रही है सीबीआई
प्रदेश में मनरेगा के रिकार्ड की जांच सीबीआई कर रही है। इस जिले का वर्ष 2007 से 2010 तक, कुल चार वर्षों का रिकार्ड मांगा गया है। यह रिकार्ड लखनऊ पहुंचा दिया गया है। सीबीआई समझेगी तो रिकार्ड खंगालने के बाद मौके पर निरीक्षण भी करेगी।
सीबीआई ने जिन वर्षों के रिकार्ड मांगे थे, उन वर्षों के कार्यों की सूची और रिकार्ड लखनऊ भेज दिए गए हैं। सीबीआई की जांच में बदायूं से जो मांगा जा रहा है या मांगा जाएगा, दिया जाएगा। जांच में सीबीआई का बदायूं से पूरा सहयोग रहेगा।
- देवेंद्र प्रताप, उपायुक्त मनरेगा