जिला अस्पताल में शुक्रवार दोपहर कोई व्यक्ति एक ऐसी युवती को वहीं स्थित मंदिर के पास छोड़कर भाग गया जिसने जहर खा रखा था। अस्पताल स्टाफ ने उसे बचाने की हरसंभव कोशिश की पर नहीं बचा सके। महिला की मौत के बाद उसकी शिनाख्त की कोशिश भी बेकार साबित हुई है। महिला ने जो नाम-पता बताया, उस पते पर भी उसकी पहचान नहीं हो सकी।
शनिवार दोपहर पौने बारह बजे करीब 25 वर्षीय युवती को कोई रिक्शे से जिला अस्पताल लेकर आया। उसने युवती को इमरजेंसी में भर्ती कराने के बजाय वहीं स्थित मंदिर के पास उतारा और चला गया। यहां युवती काफी देर तड़पती रही। दस मिनट बाद इमरजेंसी ओपीडी में तैनात फार्मासिस्ट मुकेश यादव ने उसे देखा तो इमरजेंसी में लेकर आए। युवती के मुंह से झाग निकल रहा था, उसके मुंह से सल्फास की दुर्गंध आ रही थी। युवती की जान बचाने को इमरजेंसी में तैनात डॉ. नितिन कुमार सिंह समेत पूरा स्टाफ जुट गया, बावजूद घंटे भर में उसकी मौत हो गई। इससे पहले अस्पताल स्टाफ ने उसके परिवारवालों को बुलाने की खातिर उससे नाम पता पूछने की कोशिश की। युवती ने लड़खड़ाती जुबान में अपना नाम पूजा और पति का नाम वीरेंद्र बताया। उसने अपने पिता का नाम उमाशंकर और पता चौधरी सराय लालपुल बताया। उससे पूछा गया कि उसे कौन छोड़कर गया है तो उसने मुंतजिर नाम बताया। सल्फास खाने की वजह भी वह नहीं बता सकी। युवती ने इससे पहले ही दम तोड़ दिया। अस्पताल स्टाफ ने इसकी सूचना अस्पताल चौकी प्रभारी दीनदयाल यादव को दी। उन्होंने भी प्रयास किया पर पहचान करने में सफलता नहीं मिली। बुजुर्ग समाजसेवी जेके अरोड़ा ने भी युवती की पहचान के लिए खुद गलियां छानीं। युवती ने सफेद और नीले रंग का सूट पहन रखा था। फिरोजी रंग की सलवार और उसी से मिलते रंग के मोजे पहन रखे थे।