सहसवान में साढ़े चार साल पहले हुई एसिड अटैक की घटना के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ डॉ. कपिला राघव ने नामजद आरोपी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। दोषी पर 1.56 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
अदालत ने जुर्माने की धनराशि पीड़ित को देने का आदेश दिया है। पीड़ित को पुनर्वास भत्ता दिए जाने की भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संस्तुति की है।
मामला सहसवान थाना क्षेत्र के एक गांव का है। 21 जून 2013 की रात महिला अपने बच्चों और ननद के साथ छत पर सो रही थी। गांव का ही कादिर पुत्र नसीब छत पर आ गया। आरोप था कि उसने महिला को बुरी नीयत से दबोच लिया। विरोध पर कादिर ने साथ लाए तेजाब को उसके ऊपर फेंक दिया। तेजाब से महिला और उसकी ननद बुरी तरह झुलस गई। उसके चीखने की आवाज सुनकर गांव के कई लोग मौके पर पहुंच गए थे। गांव वालों ने ही विवाहिता और उसकी ननद को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया। तेजाब से विवाहिता की दोनों आंखों की रोशनी चली गई और चेहरा भी बुरी तरह जल गया था।
पीड़ित के पति को उसकी 14 वर्षीय बेटी ने मोबाइल पर सूचना दी। पति दिल्ली में रिक्शा चलाता था। खबर सुनकर वह गांव आ गया। तब उसने आरोपी कादिर के खिलाफ पत्नी से छेड़छाड़ तथा पत्नी और बहन को तेजाब से जलाने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई। अपर सत्र न्यायाधीश ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी जगत सिंह यादव और बचाव पक्ष के वकील की दलीलों को सुनने के बाद कादिर को दोषी मानते हुए उम्रकैद के साथ ही 1.56 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा होने पर डेढ़ लाख रुपये पीड़ित को क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाने का भी आदेश दिया।
अमर उजाला फाउंडेशन ने की थी मदद
सहसवान। अमर उजाला फाउंडेशन ने पिछले साल एसिड अटैक की शिकार महिलाओं को लखनऊ में बुलाकर सम्मानित कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया था। इन महिलाओं में सहसवान की पीड़ित भी शामिल थी। तब वह दिल्ली में रहती थी। दिल्ली से बुलाकर लखनऊ में उसकी सर्जरी कराने में भी अमर उजाला फाउंडेशन ने मदद की थी। अब पीड़ित महिला अपने परिवार के साथ उझानी के एक गांव में रह रही है।