पांच साल पहले फैजगंज बेहटा क्षेत्र में हुई थी घटना
प्रेम प्रसंग के शक में पांच साल पहले हुई युवक की हत्या के मामले में स्पेशल जज ईसी एक्ट भूदेव गौतम ने दो आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, आरोपियों पर क्रमश: 25 और 20 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला गया है।
यह घटना थाना फैजगंज बेहटा क्षेत्र के गांव नूरनगर कौडिया में 31 जुलाई 2012 को हुई थी। गांव निवासी होतेलाल पुत्र सूरत सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके बेटे लालू यादव को गांव के ही साकिर उर्फ शब्बीर पुत्र नासिर, शाहरुख खां पुत्र उमर खां और मुन्ने खां पुत्र नन्हे खां दिल्ली में काम कराने के बहाने घर से ले गए थे। उसी दिन कुछ लोगों ने बताया कि गांव डगरी के पास एक लाश पड़ी है। वह भी मौके पर लाश को देखने गया तो पता चला कि लाश उसके बेटे लालू यादव की है। उसने पुलिस को घटना के बारे में बताया कि उन्हें पूरा शक है कि उक्त लोगों ने ही उसके बेटे की हत्या की है। घटना की पृष्ठभूमि के बारे में होते लाल ने कहा कि लालू की हत्या एक लड़की के साथ प्रेम प्रसंग होने के शक में की गई है। पुलिस ने उस समय आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
न्यायाधीश भूदेव गौतम ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी मुकेश बाबू यादव और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी साकिर उर्फ शब्बीर, शाहरुख को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके अलावा दोनों पर क्रमश: 25 और 20 हजार का जुर्माना भी डाला वहीं तीसरे आरोपी मुन्ने खां को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
----
रंगदारी न देने पर युवक की हत्या के मामले में भी आजीवन कारावास
बदायूं। शहर में दिनदहाड़े ढाई साल पहले रंगदारी न देने पर हुई युवक की हत्या के मामले में कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 45 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।
यह चर्चित हत्याकांड शहर कोतवाली के मुहल्ला कूंचा नीम पटियारी सराय में दो मार्च 2015 को दोपहर करीब दो बजे हुआ था। वादी मनोज कुमार पुत्र कृष्ण मुरारी लाल ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह और मुहल्ले का विकास पुत्र राजेश वर्मा स्कूटर से घर लौट रहे थे कि गली के बाहर प्रेस करने वाले की दुकान पर मुहल्ले का बंटी पुत्र राजेंद्र वर्मा मिला। आरोप था कि बंटी ने उसके तहेरे भाई पंकज वर्मा पुत्र स्वर्गीय नत्थू लाल वर्मा से रंगदारी के तौर पर 50 हजार रुपये मांगे। बंटी की बात को सुनकर मनोज और विकास वहीं पर रुक गए। देखा कि बंटी उसके तहेरे भाई से रंगदारी न देने पर जान से मारने की धमकी दे रहा है। पंकज ने कहा था कि वह मेहनत से पैसे कमाता है तो वह क्यों राशि दे। इतने पर बंटी ने तमंचे से उस पर गोली चला दी। जो उसके सीने को चीरती हुई निकल गई। गोली लगने के बाद भी पंकज हमलावर बंटी के पीछे नई सराय पुलिस चौकी तक भागा। बाद में वहीं पर गिर पड़ा और अस्पताल ले जाने पर उसकी मौत हो गई।
न्यायाधीश फॉस्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम परवेंद्र कुमार शर्मा ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी मुकेश बाबू यादव और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी बंटी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा के साथ ही उस पर 45 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला। कोर्ट ने यह भी व्यवस्था की कि जुर्माने की राशि जमा होने के बाद उसमें से आधी राशि मृतक के परिवार वालों को दी जाए।