जरीफनगर के रसूलपुर गांव में चार साल पहले वारदात
अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम रईस अहमद ने हत्या के मामले में नामजद पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। सभी पर 65 हजार पांच सौ रुपये जुर्माना भी ठोका गया है।
हत्या की वारदात जरीफनगर थाने के गांव रसूलपुर में हुई थी। गांव के ज्ञान सिंह ने 13 जून 2012 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह और उसका भाई कालीचरन बाइक से मेंथा पेराई के लिए बस्तोई गांव गए थे। वहां पर उनका रिश्तेदार कैलाश मिला। उसने कहा कि उसकी पत्नी बीमार है। उसे रसूलपुर कलां में डॉक्टर से दवा दिलवा दो। एक ही बाइक से चारों लोग दवा लेकर आ रहे थे। रास्ते में आफत पुत्र सत्यराम, राजवीर पुत्र हप्पू, ओमपाल पुत्र रमेश, मूरतराम पुत्र भूरे और गुलफाम पुत्र करन सिंह ने नाजायज असलहों के साथ उनको घेर लिया। इन लोगों ने कहा कि तुम कैलाश की बहुत मदद करते हो। आज तुमको नहीं छोड़ेंगे। इन लोगों ने नाजायज असलहों से गोली मार दी। सिर में गोली लगने से कालीचरन की मौत हो गई। विद्वान न्यायाधीश रईस अहमद ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी जगत सिंह यादव और बचाव पक्ष के वकीलों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने राजवीर, आफत, ओमपाल, मूरतराम और गुलफाम को कालीचरन की हत्या का दोषी पाया। सभी को उम्र कैद के साथ जुर्माना की सजा सुनाई।