जमीन देने के पास किसानों को उम्मीद थी कि जल्द ही बाईपास निर्माण हो जाएगा। इसके बाद रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही बची हुई जमीन की कीमत भी बढ़ेगी। किसानों के यह अरमान दो साल में भी पूरे नहीं हो सके हैं। जमीन तो चली गई लेकिन आस-पास के नौ गांवों के लोगों के लिए बाईपास नहीं मिला। इतना ही नहीं शहर के लोगों को भी जाम की समस्या से छुटकारा नहीं मिल सका। प्रदेश की पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार ने 2015 में बरेली और मुरादाबाद रोड को जोड़ते हुए बाईपास निर्माण को मंजूरी दी थी। 8.25 किमी के बाईपास के लिए सरकार ने 110 करोड़ रुपये स्वीकृत करने के साथ पहली किश्त के रूप में 42 करोड़ रुपये जारी कर दिए। इस राशि में से करीब 16 करोड़ रुपये बाईपास के लिए जमीन खरीदने में खर्च हो गए। बाकी रकम से बाईपास का निर्माण शुरू कराया गया। करीब छह किलोमीटर जमीन को समतल करने के बाद इस पर पत्थर और मिट्टी डालने का काम पूरा कर लिया गया है। इसके बाद बाईपास के निर्माण का काम ेलटका हुआ है। किसान परेशान हैं।