कादरचौक में साथ साल पहले हुई थी वारदात, एक बरी
वादी के खिलाफ झूठी गवाही देने का मुकदमा चलेगा
मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले मौलाना के अपहरण के बाद हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय ने दो लोगों को उम्र कैद और जुर्माना की सजा सुनाई है। वारदात करीब सात साल पहले कादरचौक थाना क्षेत्र में हुई थी। कोर्ट ने अपहरण और हत्याकांड के एक आरोपी को बरी कर दिया है। झूठी गवाही देने के आरोप में कोर्ट ने वादी के खिलाफ भी मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।
कादरचौक थाने के गांव बेहटा डंबर नगर निवासी वाहिद अली पुत्र जमा खां ने 23 मई 2003 को कादरचौक थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वाहिद अली का कहना था कि उसका बहनोई मौलाना अमीन खान उझानी की कुरेशिया मस्जिद में नमाज पढ़ाता था। 18 मई 2009 को सुबह करीब आठ बजे उसका बहनोई अपनी स्पलेंडर बाइक समेत लापता हो गया। मामले में पुलिस ने पड़ताल की तो 14 जून को अमीन खान का शव बरामद हुआ। पुलिस ने मुकदमा अपहरण और हत्या की धाराओं में तरमीम कर लिया। विवेचना के दौरान अकाबिर पुत्र नन्हे, रियासत उर्फ भूरा पुत्र शराफत और नदीम पुत्र तस्लीम के नाम उजागर हुए।
तीनों पर अपहरण और हत्या का मुकदमा चलाया गया। विद्वान न्यायाधीश सोनिका चौधरी ने अभियोजन की ओर से एडीजीसी बिलाल उद्दीन और सैयद ऐनुल हुदा नकबी और बचाव पक्ष के वकील की दलीलों को सुनने। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अकाबिर और रियासत को अपहरण के बाद हत्या का दोषी करार दिया। एक आरोपी पर 21 और एक पर 22 हजार रुपये का जुर्माना ठोंकने के साथ उम्र कैद की सजा सुनाई। जबकि तीसरे आरोपी नदीम को बरी कर दिया। नदीम के खिलाफ झूठी गवाही देने के आरोप में कोर्ट ने वादी वाहिद अली के खिलाफ भी मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।
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बुजुर्ग की हत्या मामले में दो लोगों को उम्रकैद
बदायूं। घर के बाहर सो रहे बुजुर्ग की हत्या के मामले में सुनवाई कर रहे अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ कपिला राघव ने दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्र कैद और 22-22 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। नामजद दो आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
जरीफनगर थाने के गांव धोवर खेड़ा निवासी वीरपाल पुत्र रामचंद्र ने 12 अगस्त 2010 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका पिता रामचंद्र घर के पास प्राइमरी पाठशाला के बरामदे में सो रहा था। दूसरी चारपाई पर उसका साला चंद्रकेश था। रात में साढ़े तीन बजे फायर होने की आवाज आई। आवाज सुनकर चंद्रकेश शोर मचाने लगा। हमलावर उसके पिता को गोली मारकर भाग निकले थे। अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
करीब 10 दिन बाद उसके साले चंद्रकेश ने गांव निवासी ओमप्रकाश पुत्र गजराम, ग्रीश पुत्र सोरन, हरी सिंह पुत्र रामफल और कुआडांडा थाना सहसवान के प्रकाश उर्फ बाबा पुत्र रामफल को पहचान लिया। आरोपियों पर हत्या का केस चलाया गया। विद्वान न्यायाधीश कपिला राघव ने सुनवाई के बाद प्रकाश उर्फ बाबा और हरी सिंह को हत्या में दोषी करार दिया। दोनों को उम्रकैद के साथ 22-22 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जबकि ओम प्रकाश और ग्रीश को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।