कटरा सआदतगंज गांव के लिए शैक्षिक पिछड़ापन पहले से ही अभिशाप था। मई में यहां हुई दो बहनों की मौत ने गांव को दुनिया भर में बदनाम कर दिया है। कटरा सआदतगंज कांड के बाद तमाम राजनेता गांव में आए लेकिन किसी का ध्यान यहां के शैक्षिक पिछड़ेपन पर नहीं गया।
करीब पांच हजार की आबादी वाली ग्राम पंचायत कटरा सआदतगंज में दो मजरे हैं। इनमें करीब 3700 मतदाता हैं। ग्राम पंचायत में एक जूनियर हाई स्कूल है, जिसमें छात्र-छात्राएं दोनों पढ़ते हैं। आठवीं कक्षा के बाद माध्यमिक शिक्षा के लिए छात्र-छात्राओं को गूरानवीगंज, उसावां, गड़िया हरदोपट्टी के साथ कंपिल (फर्रुखाबाद) और कलान (शाहजहांपुर) जाना पड़ता है। कटरा सआदतगंज से कलान की दूरी 16 किलोमीटर, कंपिल की 12 और उसावां 14 किलोमीटर दूर है। गूरानवीगंज तक जाने के लिए छात्र-छात्राओं को 20 और गड़िया हरदोपट्टी तक जाने के लिए 13 किलोमीटर का सफर तय करना होता है। ऐसे हालात में ज्यादातर लड़कियां आठवीं पास करने के बाद घर बैठ जाती हैं।
सांसद आदर्श गांव योजना से भी अछूता
बदायूं। कटरा सआदतगंज छह महीने पहले सुर्खियों में आ गया था। भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा के तमाम बड़े नेता इस कांड के बाद गांव पहुंचे थे। सब यहां के पिछड़ेपन से परिचित भी हो गए। बावजूद इसके लोकसभा या राज्यसभा सांसद ने गांव को सांसद आदर्श गांव योजना के तहत गोद लेने की जरूरत नहीं समझी।
यातायात के नाम पर सिर्फ दो बसें
बदायूं। गांव में यातायात सेवा के नाम पर रोडवेज की दो बसें हैं। एक बस सुबह करीब आठ बजे बदायूं के लिए आती है और दूसरी शाम को। ऐसे में शिक्षा के लिए दूसरी जगह जाने वाले विद्यार्थियों को ज्यादा समस्याएं होती हैं। इन दोनों बसों का समय भी निर्धारित नहीं रहता।
सुलभ के काम से खुश हैं गांव वाले
बदायूं। कटरा सआदतगंज कांड के बाद सुलभ इंटरनेशनल ने गांव में कुछ ऐसा किया जिससे गांव के लोग खुश हैं। कटरा सआदतगंज कांड जब हुआ था उस समय कहा गया था कि दोनों लड़कियां घर से शौच के लिए जंगल में गई थीं। वहां उनके साथ रेप हुआ। बाद में दोनों की हत्या कर शव पेड़ पर लटका दिए गए। गांव की महिलाएं और लड़कियां खेत पर शौच के लिए न जाएं इसके लिए सुलभ इंटरनेशनल ने गांव में जरूरतमंद 108 घरों में स्वच्छ शौचालयों का निशुल्क निर्माण कराया।