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हादसा नहीं, सोची समझी साजिश की शंका 

Sat, 27 Aug 2016 12:43 AM IST
ब्यूरो /बदायूं
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हादसा - फोटो : बदायूं/उत्‍ततर प्रदेश्‍ा
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 नोएडा के रहने वाले दो परिवारों के छह लोगों से भरी ईको कार बुलंदशहर के नरौरा बांध में डूबना महज हादसा न होकर, बल्कि एक सोची समझी साजिश नजर आ रही है। ऐसी आशंका हालात को देखकर बदायूं पुलिस व्यक्त कर रही है। इस साजिश की प्लानिंग बदायूं में छोटी ज्यारत के पास स्थित एक ढाबे पर रची गई थी, जिससे पूरा परिवार अंजान था। पुलिस की मानें तो इसको अंजाम देने वाली मृतक राजे की अपनी बेटी प्रीति और उसका एक साथी है।  
गौतम बुद्धनगर के सूरजपुर थाना क्षेत्र के ललित कुमार पुत्र राजे ने बताया कि वह, उसके पिता राजे, मां धर्मवती, बहन प्रीति, पत्नी शीतल, मामा राजेंद्र, मामी प्रीति, भगत सलीम और ड्राइवर ओमपाल किराए की ईको कार से बड़ी ज्यारत पर मन्नत मांगने के लिए आए थे। गुरुवार दोपहर करीब एक बजे वो लोग बड़ी ज्यारत पहुंचे। वहां पर चादर और फूल चढ़ाकर एक ढाबे के पास आराम करने लगे। इसके बाद शाम करीब सात बजे उसकी बहन प्रीति और मां धर्मवती कोल्ड ड्रिंक लेकर आईं। ये सभी लोगों को पिला दी। इसके बाद सभी लोग बेसुध होकर सो गए। 
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होटल के किनारे गाड़ी खड़ी होने और उसमें बैठे लोगों के शांत लेटे हुए देखकर आसपास के लोगों ने लालपुल चौकी इंचार्ज को रात करीब डेढ़ बजे सूचना दी। चौकी इंचार्ज अजय यादव चीता-वन और माइक-वन लेकर मौके पर पहुंचे। वहां पर उन्होंने ड्राइवर ओमपाल का डीएल चेक किया। साथ ही रुकने की वजह पूछी, इस पर प्रीति ने कहा कि वे लोग ज्यारत में आए थे और थक गए हैं। थोड़ी देर में चले जाएंगे। पुलिस के पूछताछ करने पर वह कुछ घबरा सी गई थी। इस दौरान पुलिस के पूछताछ करने पर ललित की पत्नी शीतल को कुछ होश आ गया, तो उससे भी पुलिस ने बातचीत की थी, लेकिन वह अलसाई सी लगने की वजह से ज्यादा जवाब नहीं दे पाई। 
चौकी इंचार्ज ने सुरक्षा के लिहाज से चीता-वन को मौके पर ही छोड़ दिया। चीता वन के सिपाही सोनू और जोगेंद्र के मुताबिक रात करीब दो बजे प्रीति के साथ एक और लड़का आया, वह ड्राईविंग सीट पर बैठा और गाड़ी लेकर चला गया। इससे पहले शीतल, राजेंद्र और ललित गाड़ी से उतर गए थे। पुलिस की मानें तो प्रीति उस गाड़ी से नहीं गई, जबकि प्रीति के भाई ललित के मुताबिक उसकी बहन ईको कार में ही चली गई थी। 
शहर से रात में जाने के बाद करीब 96 किलोमीटर दूर जाकर नरौरा नहर में ये कार गिर गई, जिसमें राजे, धर्मवती और प्रीति पत्नी राजेंद्र की मौत हो गई, जबकि चालक ओमपाल, भगत सलीम और प्रीति तीनों की कोई सूचना नहीं मिल सकी। ललित के मुताबिक केवल नौ लोग नोएडा से आए थे। अगर बदायूं की पुलिस की मानें तो यहां से दसवां व्यक्ति कार चलाकर ले गया था। प्रीति पुत्री राजे यहीं पर उतर गई थी। इससे प्रीति पर शक का दायरा बढ़ रहा है। कार में तीन लोगों के न मिलने से ये शक और पुख्ता हो रहा है। 
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पिता को कैंसर में मिलने लगा था आराम 
बदायूं। ललित के मुताबिक उसके पिता राजे को पेट में कैंसर था, जिससे उसको राहत मिलने लगी थी। इसी वजह से वह यहां पर चादरपोशी करके मन्नत मांगने आए थे, कि उनके पिता का कैंसर पूरी तरह से सही जाए, लेकिन यहां से निकलते वक्त हुई घटना में उनके पिता समेत छह लोग नहर में डूब गए। 
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प्रीति ने पिलाई थी कोल्ड ड्रिंक 
बदायूं। ललित के मुताबिक वे लोग पानी तो घर से ही लाए थे। यहां आकर केवल कोल्ड ड्रिंक खरीदी थी। ये उसकी बहन प्रीति और मां धर्मवती लेने गई थीं, लेकिन सभी को कोल्ड ड्रिंक पिलाई बहन प्रीति ने। इसके बाद वह बेहोश हो गया। उसके बाद उसे कोई जानकारी नहीं कि आगे क्या हुआ। 
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होश आने पर की जीजा को कॉल  
बदायूं। ललित ने बताया कि उसे शुक्रवार अल सुबह चार बजे होश आया, तो उसने जीजा वेद नागर को कॉल करके मामले की सूचना दी। इस पर वेद और उनके मिलने वाले दो गाड़ियां लेकर यहां पर पहुंचे। बकौल वेद रास्ते में बुलंदशहर के पास वह करीब साढ़े सात बजे पहुंचे, तो वहां पर भीड़ देखकर पूछा, तो किसी ने कार डूबने की बात कही। इस पर वेद ने वहां पर मौजूद पुलिस और कुछ लोगों को अपनी कार का नंबर, मोबाइल नंबर आदि दे दिया। साथ ही उनके घरवालों के नाम बता दिए। बदायूं पहुंचने पर उनके रिश्तेदारों की ही कार डूबने की सूचना मिली, तो वह बुलंदशहर के लिए रवाना हो गए।
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