पांच साल पहले विचाराधीन बंदी की जेल में हुई थी मौत
मानवाधिकार आयोग का नोटिस, तैयार किया जा रहा जवाब
जिला जेल में करीब पांच साल पहले फिरासत उर्फ फिराकत नाम के बंदी की मौत के मामले में मानवाधिकार आयोग ने रिपोर्ट तलब की है। पांच साल के बाद मामले में जवाब तलब किए जाने के बाद स्वास्थ्य महकमा रिकार्ड खंगालने में जुट गया है।
विचाराधीन बंदी फिरासत उर्फ फिराकत पुत्र मेहंदी हसन की दो फरवरी 2012 को जिला जेल में मौत हो गई थी। वह बीमार चल रहा था। जेल प्रशासन फिरासत का इलाज भी करा रहा था। मौत के बाद बंदी के परिवार वालों ने जेल प्रशासन पर आरोप लगाए थे। मामले का संज्ञान मानवाधिकार आयोग ने भी लिया। मानवाधिकार आयोग ने प्रदेश के प्रमुख सचिव चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं से फिरासत की मौत के मामले में रिपोर्ट मांगी। इसके बाद प्रमुख सचिव ने इस संबंध में सीएमओ बदायूं को लिख दिया है। शासन स्तर से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद सीएमओ ऑफिस में फिरासत के इलाज से लेकर पोस्टमार्टम तक का रिकार्ड खंगाला जा रहा है। पांच साल के लंबे समय से बाद मामले में रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद स्वास्थ्य महकमा भी पसोपेश में है। बंदी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के संबंध में जिला अस्पताल प्रशासन को लिखा गया है। सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा का कहना है कि रिपोर्ट तैयार की जा रही है। समय से भेज दी जाएगी।