किसानों को दी गई राहत राशि में दो करोड़ से अधिक का घपला सामने आ चुका है। इसकी परतें खुलें तो प्रदेशभर में इस प्रकार के घपले सामने आ सकते हैं। जिले की सहसवान और बिल्सी तहसील के अलावा अभी किसी तहसील में वितरित राहत का सत्यापन किसानों से कराया जाए तो घपला की गई धनराशि बढ़ सकती है। अभी तक कई बदायूं समेत जिलों का नाम इस घपले में उजागर हो चुका है। प्रशासन फिर भी इसकी परत हटाने में दिलचस्पी नहीं ले रहा है। बदायूं में 46.26 करोड़ सूखा राहत के लिए और 59.57 करोड़ रुपये अतिवृष्टि से हुए नुकसान के लिए प्राप्त हुए थे।
यहां बता देें कि जब अतिवृष्टि और सूखा राहत का धन वितरित किया जा रहा था, उसी समय किसान आंदोलित थे। जिले में इसके लिए प्रदर्शन भी हुए। लेखपालों की भूमिका पर उंगलिया खूब उठीं लेकिन प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। आज जब सहसवान और बिल्सी का मामला सामने आया तो पता चला है कि जिले में भी करोड़ों का राहत घोटाला कर दिया गया है। इसमें लेखपाल, बैंक और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत निकल सकती है। सहसवान में दो लेखपालों के खिलाफ मुकदमा दर्जकर घपला एकीकृत कर दिया गया है। अभी सघन जांच की जरूरत है। बर्वाद किसानों द्वारा आत्महत्याएं यूं ही नहीं होती हैं। इसमें इस प्रकार के घोटाले करने वालों की भूमिका भी कम नहीं है। बिल्सी थाने में तहसीलदार ने इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज करा दी है। बड़ा मामला होने के कारण इसकी जांच किसी बड़ी एजेंसी को नहीं दी गई तो पूरा राजफाश हो यह संभव नहीं है। इसे लेकर तीखी किसान संगठनों समेत विपक्षी दलों में तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई है।