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गिरिजा हम शर्मिंदा हैं...

Fri, 03 Feb 2017 11:02 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
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गिरिजा हम शर्मिंदा हैं... - फोटो : अमर उजाला
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घर में शौचालय होता तो शायद न जाती रिसौली की बेटी की जान
गांव की आधी से ज्यादा आबादी खुले में शौच को विवश
 घर में शौचालय न होने का खमियाजा रिसौली गांव की 16 वर्षीय बेटी गिरिजा को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा। बुधवार को सुबह वह घर से खेत में शौच को गई थी। इस दौरान गला घोटकर उसकी हत्या कर दी गई। गिरिजा खेत में मृत पड़ी पाई गई। उसके हत्यारे कौन हैं और उसको किस लिए मारा गया, यह पुलिस जांच का विषय है लेकिन इस घटना ने 22 हजार आबादी वाले अंबियापुर ब्लाक और बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव रिसौली के शौचालय विहीन परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, जिनको खुले में शौच को जाना होता है।
गिरिजा के परिवार वाले और गांव के लोग भी मानते हैं कि अगर घर में शौचालय होता तो बेटी को खुले में शौच के लिए नहीं जाना पड़ता। जाहिर है कि ऐसे में वह शायद जिंदा होती। रिसौली गांव की इस बेटी की हत्या स्वच्छ भारत मिशन और उससे पहले चले निर्मल भारत जैसे सरकारी अभियानों की जमीनी हकीकत की तस्वीर बयां करती है। स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर केंद्र सरकार घर-घर शौचालय निर्माण के लिए करोड़ो-अरबों रुपया दे रही है लेकिन खुले में शौच के सामाजिक कलंक से मुक्ति फिर भी नहीं हो पा रही है। जमीनी स्तर पर योजना के क्रियान्वयन में कहीं न कहीं खामियां हैं या फिर सिस्टम की अनदेखी कि गांवों में परिवारों को शौचालय नसीब नहीं हो पा रहे हैं। नतीजतन, गांव की बहु-बेटियों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है।
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सात सौ परिवार हैं शौचालय विहीन
रिसौली। बिल्सी थाना क्षेत्र के रिसौली गांव में सात सौ परिवार ऐसे हैं, जिनके सदस्य खुले में शौच को जाते हैं। यह संख्या गांव में कुल 13 सौ  परिवारों में आधे से ज्यादा है। गांव के ज्यादातर परिवार जीवकोपार्जन के लिए कृषि और मजदूरी पर निर्भर हैं, नतीजतन भरण-पोषण के अतिरिक्त इतना भी  नहीं बचा पाते कि घर में एक शौचालय का खर्चा भी कर पाएं। ऐसे में,  अपने-अपने घरों में स्वच्छ शौचालय के लिए वे स्वच्छ भारत जैसी सरकारी  योजनाओं से उम्मीद करते हैं लेकिन यह योजना अभी रिसौली गांव से कोसों दूर  है। अंबियापुर ब्लाक के खंड विकास अधिकारी यानी बीडीओ कहते हैं कि स्वच्छ  भारत योजना का लाभ फिलहाज लोहिया समग्र गांव तक सीमित है और इसमें रिसौली  शामिल नहीं है। चौंकाने वाले बात यह है कि गांव में 68 बीपीएल और 64  अंत्योदय परिवारों कागजों में तो हैं लेकिन उनके घरों में भी स्वच्छ शौचालय  नहीं बनाए गए हैं। गांव के पंचायत सचिव श्रीपाल सिंह का कहना है कि उनको  गांव का चार्ज अभी कुछ दिन पहले मिला है, इसलिए उनको बहुत जानकारी नहीं है।  ग्राम प्रधान विमला देवी कहती हैं कि गांवों में स्वच्छ शौचालय बनवाने के  लिए कई बार प्रस्ताव भेजे गए लेकिन ब्लाक और जिला स्तरीय अधिकारियों से  प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी।  गांव के दुष्यंत कहते हैं कि जाहिर है कि खुले में शौच जाने  पर महिलाओं और लड़कियों को खतरा बना रहता है। 
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जो गांव समग्र ग्राम और ओटीएफ योजना में चयनित किए गए हैं। वहां ग्रामीणों को स्वच्छ शौचालय बनाए जा रहे हैं। रिसौली गांव को इसमें चयनित नहीं किया गया है। प्रयास चल रहा है कि गांव को किसी योजना में चयनित किया जाए।
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-राम दुलार, खंड विकास अधिकारी अंबियापुर
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गला घोटकर हत्या किए जाने की हुई पुष्टि
बदायूं। बिल्सी थाने के गांव रिसौली के खेत में मिले 16 वर्षीय किशोरी के शव का पोस्टमार्टम शुक्रवार को तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया। पोस्टमार्टम में गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई है। घर में शौचालय न होने की वजह से रिसौली के आनंदपाल की 16 वर्षीय बेटी गिरिजा गुरुवार को शौच को गई थी। इसी दौरान हत्यारों ने उसकी हत्या कर शव सरसों के खेत में फेक दिया। शुक्रवार को डॉ. आंशू अग्रवाल, डॉ. अमित वार्ष्णेय और डॉ. नेहा ने गिरिजा के गिरिजा के शव का पोस्टमार्टम किया। हालांकि, पोस्टमार्टम में किशोरी से दुष्कर्म जैसी कोई बात सामने नहीं आई है फिर भी प्राइवेट पार्ट से स्लाइड बनाकर प्रिजर्व कर ली गई है।
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