गवाह बने सगे भाई कोर्ट में मुकरे तो कोर्ट ने की तीखी टिप्पणी
पिता की चाकू से गोदकर हत्या करने के मामले में कोर्ट ने पुत्र को दोषी करार देकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उस पर 13 हजार रुपये का जुर्माना भी बोला है। हालांकि इस मामले में घटना के गवाह बने आरोपी के दो सगे भाई ऐन वक्त पर मुकर गए थे।
घटना इस्लामनगर थाने के गांव मईकलां की है।
वादिनी सुशीला देवी पत्नी पृथ्वीपाल सिंह ने एक मई 2012 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि शाम को करीब पांच बजे उसका पुत्र बबलू उर्फ नरेश घर के आंगन में चारपाई पर बैठकर शराब पी रहा था। उसी समय उसके पति घर में आए। उन्होंने बबलू को शराब पीते देख मना किया और डांटा। इसी बात से खफा होकर बबलू ने चाकू निकाल लिया। अपने पिता के पेट और शरीर पर ताबड़तोड़ प्रहार कर उन्हें लहूलुहान कर दिया। वादिनी के शोर मचाने पर उसके दो अन्य पुत्र दिनेश और विनोद भी आ गए। आरोपी बबलू इस बीच चाकू लेकर भाग गया। उसके पति पृथ्वीपाल की अस्पताल ले जाते वक्त मौत हो गई।
स्पेशल जज (एससीएसटी एक्ट) नलिन कुमार श्रीवास्तव ने अभियोजन की ओर से एडीजीसी रईस अहमद और बचाव पक्ष की दलील सुनने के बाद बबलू को पिता की हत्या का दोषी करार दिया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 13 हजार रुपये अर्थ दंड भी डाला।
गवाही में शामिल दो भाइयों के मुकरने पर कोर्ट हुआ नाराज
बदायूं। इस प्रकरण में हत्या के गवाह आरोपी के दो सगे भाई विनोद और दिनेश के ऐन वक्त पर गवाही से मुकर जाने पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की। कहा कि गवाहों ने घटना का समर्थन नहीं किया है। कार्रवाई में सूत्रधार की भूमिका नहीं दी जा सकती। गवाह अपनी इच्छानुसार बयान नहीं बदल सकते। कोर्ट ऐसे मामले में किसी के हाथ का खिलौना नहीं बन सकता और न ही मूकदर्शक बना रह सकता है।