गैंगरेप का शिकार 12 वर्षीय बालिका की मेडिकल रिपोर्ट अब तक तैयार नहीं हो सकी है। हालांकि बालिका की प्राइमरी मेडिकल और उम्र की जांच की रिपोर्ट पुलिस को मिल चुकी है, लेकिन अब तक उसकी स्लाइड जांच में फंसी हुई है। जिला अस्पताल की पैथालॉजी से स्लाइड जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही साफ हो सकेगा कि बालिका के साथ गैंगरेप हुआ या नहीं। डॉक्टरों की लापरवाही से पहले ही उसके मेडिकल में देरी हो गई थी।
उघैती के एक गांव में शुक्रवार को 12 साल की बालिका से तीन किशोरों ने गैंगरेप किया था। शनिवार को किशोरी के पिता की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने बालिका को मेडिकल के लिए जिला महिला अस्पताल भेज दिया। शनिवार और रविवार को उसका मेडिकल नहीं हो सका। सोमवार को प्राइमरी मेडिकल हुआ। इसमें प्रथम दृष्टया रेप की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद स्लाइड बनाकर जिला अस्पताल की पैथालॉजी भेज दी गई। यह स्लाइड पैथालॉजी में फंस गई है। डॉक्टरों की लापरवाही के चलते पांच दिन बाद भी पुलिस को स्लाइड जांच रिपोर्ट नहीं मिल सकी है।
इधर, बुधवार को बालिका के प्राइमरी मेडिकल की सप्लीमेंट्री रिपोर्ट और सीएमओ के यहां से उम्र की जांच रिपोर्ट पुलिस को मिल गई है। मेडिकल परीक्षण के आधार पर सीएमओ ने बालिका की उम्र 12 साल घोषित की है। सप्लीमेंट्री जांच रिपोर्ट में भी उसके साथ गैंगरेप होने की प्रथम दृष्टया पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की नजरें अब स्लाइड जांच रिपोर्ट पर हैं।
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जिला अस्पताल में लटकती है स्लाइड जांच
बदायूं। रेप-गैंगरेप के मामले में प्राइमरी मेडिकल जिला महिला अस्पताल में होता है। रेप के मामले में अक्सर यहां से स्लाइड बनाकर जिला अस्पताल की पैथालॉजी भेज दी जाती है। पैथालॉजी में अक्सर स्लाइड की जांच कई-कई दिन लटकी रहती है। संवेदनशील मामलों में भी जिला अस्पताल की पैथालॉजी के स्तर से भी लापरवाही बरती जाती है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है।
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पांच दिन के बाद भी रेप केस में स्लाइड की जांच न होना गंभीर बात है। जिला अस्पताल प्रशासन से स्लाइड जांच में देरी होने के विषय में बात की जाएगी। अगर कहीं पर लापरवाही हुई है तो कार्रवाई होगी।
-डॉ. नरेंद्र कुमार, सीएमओ