अपहरण का ड्रामा रचने और एटा जेल में फिरौती देने के बाद छूटने के नाटक का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। मामले में दो सगे भाइयों समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मोबाइल सर्विलांस के जरिए पुलिस 50 दिन बाद घटना का वर्क आउट कर सकी। पूरा नाटक जमीन को लेकर चल रहे विवाद में विरोधियों को फंसाने का निकला है।
कादरचौक थाने के बरचऊ गांव निवासी रामनिवास पुत्र महेंद्रपाल ने आठ जून को कादरचौक थाने में अपने अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि 23 अप्रैल को कुछ लोग उसको अगवा कर ले गए। 28 दिन तक वह उनके कब्जे में रहा। उसे मुक्त करने के बदले बदमाशों ने पांच लाख रुपये की फिरौती ली। फिरौती की रकम का इंतजाम उसके पिता ने तीन बीघा जमीन बेचकर किया। फिरौती के दो लाख रुपये 18 मई को एटा जेल में बंद बॉबी नाम के बदमाश को दिए गए। तीन लाख रुपये 19 मई को बॉबी के करने पर दूसरे बदमाश को दिए गए। 20 मई को बदमाशों ने उसे छोड़ दिया तो वह घर पहुंचा। उसका मोबाइल भी बदमाशों ने लूट लिया था।
रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस घटना की तफ्तीश में जुटी। एक टीम को एटा जेल भेजकर रिकार्ड दिखवाया गया तो पता लगा कि 18 जून को बॉबी नाम के बंदी से किसी ने मुलाकात नहीं की। इसके बाद पुलिस ने रामनिवास और उसके परिवार वालों से पूछताछ की। उसका मोबाइल भी सर्विलांस पर लगाया गया। सर्विलांस ने घटना के कई पहलू उजागर कर दिए। पुलिस ने सख्ती की तो रामनिवास टूट गया। उसने बताया कि गांव के नेत्रपाल, संजीव और अवधेश से उसका जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। इनको फंसाने के लिए उसने कासगंज के भिदौनी गांव निवासी अपने बहनोई के भाई नेकसे उर्फ नेपाल के साथ यह स्क्रिप्ट तैयार की थी। पुलिस ने रामनिवास, उसके भाई भूरे और नेकसे को गिरफ्तार कर घटना का पर्दाफाश कर दिया है।
बाइल में दूसरा सिम डालकर फंसा रामनिवास
रामनिवास का मोबाइल 23 अप्रैल से बंद जा रहा था। पुलिस ने उसका नंबर सर्विलांस पर लगा दिया था। रामनिवास का कहना था कि बदमाशों ने उसका मोबाइल लूट लिया है। उससे यह चूक हो गई कि उसने इसी मोबाइल में दूसरा नंबर डालकर मोबाइल चालू कर लिया। सर्विलांस और ईएमआई नंबर के जरिए पुलिस ने इसकी पकड़ कर ली। इसके बाद कड़ी से कड़ी जुड़ती गई और कादरचौक पुलिस ने घटना का पटाक्षेप कर दिया।
रामनिवास ने मुक्त होने के बाद अपने अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। उसका कहना था कि बदमाशों ने पांच लाख रुपये की फिरौती भी वसूली। मोबाइल सर्विलांस और पूछताछ के बाद पता लगा है कि यह विरोधियों को फंसाने की साजिश थी।-सतीश शर्मा, सीओ उझानी