-पुलिस ने एक साल बाद मामले में लगा दी थी एफआर
न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश पंचम परवेंद्र कुमार शर्मा ने दहेज हत्या के मामले में नामजद पति और सास को दोषी करार देते हुए 10-10 साल कैद और सात-सात हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना से आधी रकम बतौर मुआवजा मृतका के मायके वालों को दी जाएगी।
मामला थाना वजीरगंज के गांव अगेई का है। रामपुर जिले के रहने वाले छोटेलाल शर्मा ने अपनी बेटी मीना की शादी अगेई गांव के विष्णु पाठक पुत्र राजाराम के साथ 22 अप्रैल 2002 को की थी। छोटेलाल के मुताबिक, उन्होंने अपनी हैसियत के मुताबिक दान-दहेज भी दिया। इसके बाद भी ससुराली दहेज में 50 हजार रुपये नगदी और बाइक की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर मीना को प्रताड़ित करते थे। 25 मई 2005 को ससुरालियों ने मीना की जहर खिलाकर हत्या कर दी। उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया। वह रिपोर्ट दर्ज कराने गया तो पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इसके बाद उसने सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत कोर्ट में अर्जी दी। कोर्ट में पुलिस को रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया। विवेचना के बाद पुलिस ने मामले में एफआर लगा दी थी। वादी के प्रोटेस्ट पर कोर्ट ने एफआर खारिज कर दहेज हत्या के मामले में मीना के पति विष्णु और सास लौंगवती पर दहेज हत्या का मुकदमा चलाया। विद्वान न्यायाधीश परवेंद्र कुमार शर्मा ने पत्रावली में मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी राजीव यादव और बचाव पक्ष के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद मीना के पति विष्णु पाठक और सास लौंगवती को दहेज हत्या का दोषी पाते हुए दोनों को 10-10 साल कैद और सात-सात हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।