दातागंज में 15 दिन में तीसरी बढ़ी बरामदगी
दातागंज क्षेत्र में गोवंशीय पशुओं की तस्करी का धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा। मंगलवार को भी पुलिस ने दो अलग-अलग स्थानों से 35 गोवंशीय पशु बरामद कर नौ तस्करों को गिरफ्तार किया। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले कई तस्कर भाग चुके थे। कई पशुओं को ग्रामीण भी ले जा चुके थे। दातागंज क्षेत्र में गोवंशीय पशुओं की 15 दिन में यह तीसरी बड़ी बरामदगी है।
दातागंज क्षेत्र के गांव अंधरऊ के पास ग्रामीणों ने गोवंशीय पशुओं की खेप जाती हुई देखी। ग्रामीणों ने तस्करों को टोका तो तस्कर पशुओं को छोड़कर भागने लगे। यहां ग्रामीणों ने पांच तस्करों को दबोच लिया। खबर पुलिस को दी गई। इसके करीब एक घंटे के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। तस्करों को हिरासत में लेकर पशुओं को ग्रामीणों की सुपुर्दगी में दे दिया गया। पुलिस के आने से पहले चार तस्कर भाग चुके थे।
दूसरा मामला दातागंज में बुध बाजार के पास का है। यहां भी तस्कर पशुओं की खेप ले जा रहे थे। आसपास के लोगों ने टोका तो तस्कर पशुओं को छोड़कर भागने लगे। यहां से लोगों ने चार तस्करों को दबोच लिया। इनके कब्जे में 11 गोवंशीय पशु मिले। पुलिस ने तस्करों को हिरासत में ले लिया है। पिछले सप्ताह दातागं-बरेली रोड पर तस्कर गोवंशीय पशुओं से भरा ट्रक छोड़कर भाग गए थे। ट्रक से 75 पशु बरामद हुए थे। इससे पहले दातागंज में गोवंशीय पशुओं से भरा टैंकर पकड़ा गया था।
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172 दिन में गोवध और पशु तस्करी के 75 मामले
बदायूं। पशु तस्करी के मामले में बदायूं बदनाम हो रहा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि चालू साल के 172 दिन में जिले में पशु तस्करी और गोवश के 75 मामले दर्ज हुए हैं। सबसे ज्यादा मामले दातागंज और सहसवान सर्किल में सामने आए। गोवध और गोवंशीय पशुओं की तस्करी में बिसौली सर्किल भी पीछे नहीं रहा। इस दौरान जिले में 12 स्थानों पर बूचढ़ख़ाने भी पकड़े गए।
पुलिस रिकार्ड पर गौर करें तो एक जनवरी से 20 जून तक जिले में गोवंशीय पशुओं की तस्करी के 75 मामले सामने आए। गौर करने वाली बात यह है कि 13 मामलों में पुलिस को अब तक आरोपियों का पता ही नहीं है। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों ने अलग-अलग स्थानों से 520 पशुओं की बरामदगी की और 24 वाहन पकड़े। इन वाहनों का इस्तेमाल पशु तस्करी के लिए किया जाता था। 122 लोगों को पशु तस्करी और गोवंशीय पशुओं के वध के मामले में जेल भेजा गया।
किसी से छिपा हुआ नहीं है कि जिले में बड़े पैमाने पर गोवंशीय पशुओं की तस्करी हो रही है। पिछले दिनों यह बात सामने भी आ चुकी है कि तस्करी के पीछे खाकी और खादी का गठजोड़ है। जाहिर सी बात है कि गोवंशीय पशुओं के वध से एक धर्म विशेष की भावनाओं को ठेस पहबुंचती है। इसके बावजूद पुलिस गोवंशीय पशुओं के वध और तस्करी पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रही है।