बहन की हत्या में दोषी पाते हुए स्पेशल जज ईसी एक्ट भूदेव गौतम ने सगे भाइयों को उम्रकैद के साथ 25-25 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। हत्या की वारदात करीब छह साल पहले उसहैत थाने के गांव में हुई थी। उसहैत थाने के गांव शिंभू नगला हाल मुगर्रा निवासी श्याम सिंह ने वर्ष 2001 में काकोरी निवासी सेवागिरी की बेटी चंद्रवती से प्रेम विवाह किया था। इससे चंद्रवती के परिवार वाले नाखुश थे। हालांकि, बाद में चंद्रवती के मायके वालों से उसके संबंध सामान्य से हो गए। श्याम सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सात सितंबर 2010 को सुबह 10 बजे उसकी पत्नी चंद्रवती अपने चार माह के बेटे को लेकर बैंक में खाता खुलवाने उसहैत गई थी। चंद्रवती जब वापस घर लौट रही थी, तभी उसके भाई देव गिरी और रवेंद्र गिरी उसे मिल गए। दोनों ने मां की तबियत खराब होने का हवाला देकर चंद्रवती से मायके चलने को कहा। चंद्रवती उनके साथ मायके चली गई। कई लोगों ने उसे अपने भाइयों के साथ मायके जाते हुए देखा भी। दिन में तीन बजे श्याम सिंह को सूचना मिली कि उसकी पत्नी चंद्रवती की उसके दोनों सालों ने हत्या कर दी है। शव घर के पास ही पड़ा है। मामले में पड़ताल कर पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी। विद्वान न्यायाधीश भूदेव गौतम ने पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी मुकेश यादव और बचाव पक्ष के वकील को सुनने के बाद कोर्ट ने चंद्रवती की हत्या में उसके भाई देव गिरी और रवेंद्र गिरी को दोष पाया। दोनों को उम्रकैद के साथ कोर्ट ने 25-25 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।