ग्रामीणों द्वारा पुलिस के कब्जे से छुड़ाए गए हंगामा करने के आरोपी युवक समेत दो लोगों के मामले में जांच करने के लिए शनिवार को सीओ सतीशचंद्र शर्मा कोतवाली पहुंचे। उन्होंने कोतवाल समेत पुलिस कर्मियों से भी घटनाक्रम को लेकर जानकारी हासिल की। जांच में अभी तक कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है लेकिन पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगा है। पुलिस के रवैए से ही अस्पताल में गुस्सा फूटा था।
शराब के नशे में हंगामा करने के आरोप में पकड़े जाने के बाद अस्पताल में मेडिकल से पहले छुड़ा लिए गए अहीरवारा निवासी वीरपाल और दुर्गपाल के राजनीतिक पैरोकारों ने शनिवार को पुलिस अफसरों को भी सच्चाई से अवगत करा दिया है। सूत्रों की मानें तो उन्होंने यह भी बताया है कि अहीरवारा के तीन लोग ढाबा से खाना खाकर निकले तभी बाइक सामने पड़ जाने पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। एक युवक तो उसी वक्त भाग गया।
वीरपाल और दुर्गपाल को मेडिकल कराने के लिए मुंशी अर्जुन सिंह और होमगार्ड को अस्पताल भेजा गया था। अस्पताल में आरोपियों के प्रति मुंशी का रवैया भी कोई खास अच्छा नहीं रहा। गुस्से की वजह भी यहीं बताई जा रही है। इस बीच, एसएसपी के आदेश पर शनिवार को सीओ सतीशचंद्र शर्मा ने मौके पर आकर पुलिस कर्मियों से बात कर उनके बयान भी दर्ज किए। ढाबा मालिक से भी पूछताछ की गई है। जांच में अभी अस्पताल कर्मियों समेत डॉक्टर का भी बयान होना बाकी है।
नौ लोगों पर नामजद रिपोर्ट दर्ज
अहीरवारा के वीरपाल और दुर्गपाल को मेडिकल से पुलिस के चंगुल से छुड़ा लेने के मामले में कोतवाली में दोनों आरोपियों समेत नौ लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट और हंगामा करने की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। नामजदों में उर्वेश, योगेश, सूरजपाल, कल्लू, हरीश और विजेंद्र के अलावा आठ-नौ अज्ञात लोग शामिल हैं। वीरपाल और दुर्गपाल पर दफा-34 के तहत भी कार्रवाई की गई है।
मामले की जांच की जा रही है। नामजदगी भी हो चुकी है। जांच में जो भी सामने आएगा, उसके बिंदुओं पर भी गौर किया जाएगा। वह जल्द ही एसएसपी को जांच रिपोर्ट सौंप देंगे। -सतीशचंद्र शर्मा, सीओ, उझानी।