इटावा से रामपुर दो ट्रकों से ले जाए जा रहे थे पशु
ट्रकों के आगे चल रही थी तस्करों की लग्जरी कार
वध के लिए ले जाए जा रहे 66 गोवंशीय पशुओं को बरामद कर पुलिस ने चार पशु तस्करों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले तस्करों ने पुलिस पर फायरिंग भी की। तस्कर पशुओं को दो ट्रकों में भरकर इटावा से रामपुर ले जा रहे थे। ट्रकों के आगे तस्करों की एक लग्जरी कार चल रही थी। इसे भी पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। मामलेे में गोवध निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इंस्पेक्टर सिविल लाइंस अशोक कुमार सिंह सोमवार तड़के शेखूपुर चौकी इलाके में गश्त पर थे। उनको कारदरचौक की ओर से आते हुए दो ट्रक दिखे। शक होने पर पुलिस ने ट्रकों को रुकने का इशारा किया। इस पर चालकों ने स्पीड बढ़ा दी। पुलिस ने पीछा कर ट्रकों की घेराबंदी की तो तस्करों ने फायरिंग कर दी। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई कर तस्करों को दबोच लिया। तलाशी लेने पर दोनों ट्रक से 66 गोवंशीय पशु मिले। पशुओं को नशे के इंजेक्शन देकर भरा गया था। मौके से पुलिस ने खुर्शीद पुत्र मुजीबुल हसन निवासी वनगवां जिला गोंड़ा, माजिद पुत्र मंजूर निवासी शेख जादान थाना कादरा जिला शामली, शहवाज पुत्र रफीक निवासी सतासी दरवाजा थाना जिझाना जिला शामली और रऊफ पुत्र फरूख निवासी नगरिया कामिल थाना अजीम नगर जिला रामपुर को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए तस्करों के पास से दो तमंचे और कारतूस भी बरामद हुए हैं।
पूछताछ में तस्करों ने स्वीकार किया कि वह पशुओं को वध के लिए इटावा से रामपुर ले जा रहे थे। तस्करों ने अपने कुछ साथियों के नाम भी पुलिस को बताया है। बरामद पशुओं को पुलिस ने ग्रामीणों की सुपुर्दगी में दे दिया है।
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मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पशु तस्करों के सिंडीकेट तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। गरिफ्तार तस्करों से पूछताछ की जा रही है। सभी के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई भी अलम में लाई जाएगी।-अशोक कुमार सिंह, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस
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गंगा-रामगंगा पार के जिलों तक फैले पशु तस्करों के तार
बदायूं। पशु तस्करों का नेटवर्क बदायूं से निकल कर इटावा, मैनपुरी, एटा, फर्रुखाबाद, कासगंज तक फैल गया है। उसहैत में अटैना और कादरचौक में कादरगंज गंगा पुल बनने के बाद पशु तस्करों का काम मुफीद हुआ है। इसके साथ ही दातागंज में रामगंगा पर बेलाडंडी पुल बनने के बाद बदायूं से शाहजहांपुर की दूरी भी कम हो गई है। यह तीनों पुलिस पशु तस्करों के लिए काफी मुफीद साबित हो रहे हैं।
पुलिस छोटे पशु तस्करों को तो गिरफ्तार करती है, लेकिन बड़े तस्करों के नेटवर्क तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंचते। यही वजह है कि पशु तस्करों का सिंडीकेट नहीं टूट रहा। बदायूं के बाद पशु तस्करों ने एटा, इटावा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, कासगंज के नखासों में भी अपना जाल बिछा लिया है। नखासों में एजेंटों के जरिए प्रतिबंधित पशुओं की खरीद होती है। बाद में इनको वाहनों में भर कर रातों रात रामपुर, मुरादाबाद और संभल स्थित पशु वध शालाओं में भेज दिया जाता है।
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सबसे बड़ी बरामदगी भी डंडे बस्ते में
बदायूं। छह फरवरी 2015 को जिले में सबसे बड़ा अभियान चला। पुलिस ने गोवंशीय पशुओं से भरे 75 वाहन पकड़े थे। वाहनों से सैकड़ों पशु बरामद हुए। 100 पशु तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। यह मामला भी डंडे बस्ते में चला गया है। आज तक पुलिस बड़े पशु तस्करों तक नहीं पहुंच सकी है। इन पशुओं को भी वध के लिए रामपुर, संभल और मुरादाबाद ले जाया जा रहा था।
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पशुओं की सुपुर्दगी के नाम पर हो रहा खेल
बदायूं। गोवंशीय पशुओं की सुपुर्दगी में भी खेल हो रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि जिले के वार्डर के इलाकों में कई गोशालाओं की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। गोशालाओं के संचालकों की पशु तस्करों से सांठगांठ रहती है। पशुओं को पुलिस गोशाला भेज जाती। यहां से पशुओं को फिर तस्करों को सौंप दिया जाता है।
जिले में दो महीने के दौरान गोवंशीय पशुओं की बरामदगी पर गौर करें तो यह आठवीं बड़ी बरामदगी है। इससे पहले दातागंज में तीन बार गोवंशीय पशुओं की बड़ी बरामदगियां हो चुकी हैं। सहसवान, उसहैत, कादरचौक और मुजरिया में भी बड़े पैमाने पर गोवंशीय पशुओं की बरामदगी हुई। पुलिस का दावा है कि पशुओं को ग्रामीणों और गोशालाओं की सुपुर्दगी में दे दिया जाता है, लेकिन इसका रिकार्ड पुलिस के पास नहीं है। कई बार पशुओं को गोशालाओं की सुपुर्दगी को लेकर हिंदूवादी संगठन भी मुखर हो चुके हैं। इसके बाद भी पुलिस इसे गंभीरता से नहीं ले रही।