घातक रंगों का कचरी में किया गया उपयोग, कोर्ट को सौंपा मामला
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए नमूनों की जांच में पनीर और रिफाइंड तेल अधोमानक पाए गए। इस मामले में दो लोगों पर 45 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कचरी में घातक सिंथेटिक कलर इस्तेमाल करने के मामले को गंभीर मानते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक प्रकरण कोर्ट के हवाले किया है।
खाद्य सुरक्षा प्रशासन के अभिहित अधिकारी संजय शर्मा ने बताया कि बिनावर थाना क्षेत्र के गांव मौसमपुर निवासी इलियास पुत्र शब्बीर पनीर का काम करता है। इसके पनीर का पिछले दिनों नमूना लिया गया था। जांच में नमूना सब स्टैंडर्ड पाया गया। न्याय निर्णायक अधिकारी/एडीएम प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव की अदालत में इस मामले पर सुनवाई हुई। जिसमें इलियास पर 25 हजार रुपये का जुर्माना किया गया गया और हिदायत दी गई कि पनीर का स्टैंडर्ड बनाए रखें। दूसरा मामला न्याय निर्मायक अधिकारी श्रीवास्तव की अदालत में बरेली के शिवकुमार अग्रवाल का आया। इनकी बजरंग फ्लोर मिल है। रिफाइंड तेल का कारोबार करते हैं। सहसवान के मयंक प्रोवेजनल स्टोर से पिछले दिनों इसका नमूना भरा गया था। जांच में पाया गया कि ऑयल में रेनसीडिटी है। इसे भी सब स्टैंडर्ड माना जाता है। न्याय निर्णायक अधिकारी ने सुनवाई के बाद 20 हजार रुपये का जुर्माना किया।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने दातागंज के आदेश कुमार की दुकान से रंगीन कचरी का नमूना भरकर जांच को भेजा था। इसमें सिंथेटिक कलर पाया गया। जो जीवन के लिए खतरनाक है। इसे खाद्य विभाग ने गंभीर मानते हुए प्रकरण कोर्ट के हवाले कर दिया है। इसमें सजा या सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
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मिठाई के लिए नमूने
बदायूं। अंबा टाकीज के पास बेकरी चला रहे धीरज अरोड़ा के यहां बच्चों के लिए रंगीन मिठाइयां बनाई जा रही हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अक्षय गोयल ने इन मिठाइयों में सिंथेटिक रंगों का उपयोग होना मानकर इनके सैंपल लिए हैं। इनको जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। बताते चलें कि इससे पहले भी बच्चों के लिए बने खाद्य पदार्थों में मिलावट पाई गई है।