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आग की लपटों में गुम होती चली गईं महिला और उसके दो बच्चों की चीखें

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उझानी (बदायूं)। आशा अपने बूढ़े मां-बाप के खेत-खलिहान के काम में मदद करने के लिए अपने बच्चों को लेकर दो दिन पहले ही दहेमू आयी थी। एक दिन पहले उसने गेहूं की कटाई में अपने मां-बाप का हाथ बंटाया था। रविवार सुबह वह यह कहते हुए थोड़ी देर के लिए घर पर रुक गई कि बच्चों को खाना खिलाकर खेत पर पहुंचेगी, लेकिन चंद मिनटों में ही आग ने उसे और उसके दो मासूम बच्चों को चपेट में ले लिया। बचाव के लिए वह चीखी चिल्लाई भी, मददगार बने ग्रामीणों ने आग पर काबू भी पा लिया था लेकिन जैसे-जैसे आग की लपटें बढ़ती चली गईं, वैसे-वैसे तीनों की चीखें गुम होती चली गईं।
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दहेमू गांव के धनपाल की पांच संतानों में आशा मझली थी। बहनों में तीनों का ब्याह हो चुका है। दो भाइयों में प्रमोद दिल्ली में काम करता है। रविवार सुबह छोटा भाई विनोद, पिता और मां रामरती के साथ गेहूं काटने के लिए खेत पर चला गया। आशा अपने दो साल के बेटे सुशांत और छह साल की बेटी निराली को खाना बनाकर खिलाने की बात कहकर घर पर रुक गई। हादसे के बाद पिता धनपाल ने बताया कि पिछले साल भी आशा ने उसके घर पर आकर खेती के काम में हाथ बंटाया था। धनपाल का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। ग्रामीणों की मानें तो उन्हें सुबह धनपाल के झोपड़ीनुमा घर में आग की लपटों के बीच चीखें सुनाई दी तो आसपास जो भी मौजूद था, वह बाल्टियों में पानी लेकर आग बुझाने की कोशिश में जुट गया लेकिन किसी को यह पता नहीं था कि आशा के अलावा घर में बच्चे भी आग की लपटों में घिरे हैं। आग पर काबू पाने के बाद ग्रामीण अंदर घुसे तो पहले आशा ही नजर आई। उसी के इशारे पर मलबा हटाकर देखा तो दोनों बच्चे झुलसी हालत में बेहोश नजर आए। वे जिस चारपाई पर थे, वह प्लॉस्टिक के तारों से बुनी हुई थी। बच्चों के शरीर पर इसके अवशेष भी मिले। आशा का पिता धनपाल और मां रामरती तीनों की हालत देखकर गश खाकर गिर पड़े।
...तो फिर गीता और मोहन भी चपेट में आ जाते
उझानी। धनपाल की विवाहिता बेटी आशा घर पर रुकी तो उसके साथ चार बच्चे भी थे। बच्चों में बेटी गीता (8) और बेटा मोहन (7) खेलने की कहकर घर से बाहर निकल गए। दोनों ही आपस में गेंद से खेलने लग गए। उन्होंने छोटी बहन निराली को भी साथ ले जाने की जिद की लेकिन वह, मां और छोटा भाई सुशांत घर में रहे। वह तो गनीमत रही कि मोहन और गीता अंदर मौजूद नहीं थे वरना वे भी आग की चपेट में आ जाते।
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आबादी से दूर था घर, देर से पहुंच पाए मददगार
उझानी। धनपाल ने जहां पर अपना झोपड़ीनुमा आशियाना बनाया, वह स्थान दहेमू से बाहरी छोर पर होने के साथ वितरोई रेलवे स्टेशन के नजदीक है। स्टेशन की ओर दहेमू के ग्रामीणों की आवाजाही भी रहती है लेकिन गेहूं की कटाई का काम शुरू हो जाने से ज्यादातर लोग घरों से तड़के ही निकल जाते हैं। इसीलिए आग की भनक लगने पर ग्रामीण मौके पर देर से पहुंच पाए। आग पर काबू पाने के लिए उन्हें स्टेशन के हैंडपंप का सहारा भी लेना पड़ा।
डबल लेयर पाइप का ही प्रयोग करें उपभोक्ता
बदायूं। जिला पूर्ति विभाग के एआरओ महेश गौतम ने कहा है कि सिलिंडर के साथ पारदर्शी वाले प्लास्टिक के पाइप का प्रयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इसके लिए कंपनियों की तरफ से डबल लेयर वाले पाइप आते हैं, जिनके अंदर तार होने के कारण चूहे नहीं काट पाते। इनका प्रयोग घरों में किया जाना चाहिए। इसके अलावा रेग्युलेटर भी अब स्पेशल आ रहा है। किसी भी स्थिति में सिलिंडर तक आग पहुंचने पर यह स्वत: ही बंद हो जाता है, जिससे सिलिंडर तक आग नहीं पहुंच पाती। उपभोक्ताओं को पुराना रेग्युलेटर बदलकर नए रेग्युलेटर का प्रयोग करना चाहिए।
साधारण रेग्युलेटर व पाइप देने वाले संचालकों पर होगी कार्रवाई
बदायूं। एआरओ महेश गौतम ने बताया कि जिस घर में हादसा हुआ, उसमें कछला इंडेन गैस एजेंसी का उज्ज्वला कनेक्शन था। उन्होंने कहा कि उज्ज्वला कनेक्शन में उपभोक्ताओं को आईएसआई मार्का चूल्हा, सिलिंडर तथा मॉडर्न रेग्युलेटर व पाइप दिए जा रहे हैं, लेकिन अधिकांश गैस एजेंसी संचालक इन्हें उपभोक्ताओं को न देकर साधारण रेग्युलेटर व पाइप दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब ऐसे एजेंसी संचालकों पर कार्रवाई की जाएगी। ये संचालक मानव जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं, जिसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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