कादरचौक में फसल की कटाई को लेकर भिड़ंत, फायरिंग की
कटरी के गांव मुगर्रा जटेई के पास का मामला, दो लोग गिरफ्तार
पुलिस ने जमीन की पैमाइश कराने के लिए राजस्व कर्मियों से संपर्क साधा
अमर उजाला ब्यूरो
कादरचौक (बदायूं)।
गंगा किनारे की जमीन पर खड़ी फसलों को लेकर विवाद थम नहीं रहा है। ऐसा ही एक मामला सोमवार शाम को इलाके के गांव मुगर्रा जटेई के पास सामने आया। दो गुटों के लोग मसूर की फसल पर मालिकाना हक जताते हुए आपस में भिड़ गए। फसाद बढ़ा तो दोनों गुटों ने हवाई फायरिंग की। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने दो लोगों को दबोच कर दोनों गुट के चार लोगों के खिलाफ शांतिभंग में कार्रवाई कर दी है।
थाना क्षेत्र के गांव मुगर्रा जटेई के पास एक कृषि फार्म है। कृषि फार्म के पास खेत में खड़ी मसूर की फसल काटने के लिए एक व्यक्ति पहुंचा। उसने फसल काटने के लिए मजदूरों को भी लगा दिया। इसकी भनक लगते ही दूसरे पक्ष के लोग फसल अपनी हिस्से की जमीन पर बताते हुए पहुंचे। दोनों पक्ष ने अपने परिचितों ओर परिजनों को भी बुला लिया। कहासुनी के बाद दोनों गुट के लोगों ने फसलों की आड़ लेकर हवाई फायरिंग शुरू कर दी। आवास सुनकर पड़ोसी खेत में काम कर रहे एक ग्रामीण ने पुलिस को बुला लिया। पुलिस को एक पक्ष के दो लोग मौके पर मिले। जबकि पांच-छह लोग पुलिस के पहुंचने की भनक लगते ही फरार हो गए। थाना इंचार्ज सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि गुटीय फायरिंग की सूचना मिली थी लेकिन मौके पर एक पक्ष के सुखलाल और गौतम ही मिले। दोनों ने पुलिस को दूसरे गुट के लोगों के नाम भी बता दिए। थाना इंचार्ज ने बताया कि सुखपाल और गौतम समेत चार लोगों के खिलाफ शांतिभंग के तहत कार्रवाई की गई है। साथ ही जमीन के असली मालिक का पता लगाने के लिए पुलिस ने राजस्व कर्मियों से संपर्क साधा है। तब तक खेत में फसल खड़ी रहेगी।
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गुटीय संघर्ष की आशंका बरकरार
कादरचौक।
गंगा किनारे सैकड़ों बीघा ऐसी जमीन है जिस पर गेहूं और सरसों समेत मसूर की फसल पकने के लिए तैयार है। फसल उगाने वाले जमीन के असली मालिक है या फिर कोई और, इसकी असलियत तो राजस्व कर्मचारी ही साफ कर सकते हैं लेकिन पुरानी घटनाओं पर गौर करें तो पिछले कई सालों से कटरी में जमीन पर कब्जे को लेकर झगड़े-फसाद होते रहे हैं। यह बात पुलिस और राजस्व विभाग के अफसरों को भी पता है। कुछेक बार तो ऐसा भी सामने आया है कि अनाज किसी ने बोया और फसल तैयार होने पर उसे काट कोई और ले गया। सूत्रों का कहना है कि अगर ऐसा ही चला तो इलाके में गुटीय संघर्ष की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।