घटना के बाद परिवार वालों के साथ नेत्रपाल।
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म्याऊं। जमीन की खरीद-फरोख्त से कुछ ही साल में करोड़पति बने नेत्रपाल उर्फ नेता के दुश्मनों की भी कमी नहीं है। घटनाक्रम और नामजदगी से साफ होता है कि नेत्रपाल के परिवार से अच्छी तरह वाकिफ किसी शख्स ने ही कत्ल और लूट की इस वारदात को मौका भांपकर अंजाम दे दिया। यह भी तय है कि दोनाली बंदूक लेकर सो रही पूनम जाग रही होती तो हमलावरों को खदेड़ देती।
नेत्रपाल के नाम यूं तो छह बीघा के करीब पुश्तैनी जमीन रही होगी। कुछ ही वक्त में उसने जमीन की खरीद-फरोख्त से काफी धन कमाया और गांव से करीब आधा किमी दूर म्याऊं रोड पर आलीशान मकान बना लिया। सूत्र बताते हैं कि महंगी जमीनों की खरीदारी में नेत्रपाल कभी सीधे शामिल होते हैं तो कभी बिचौलिये की भूमिका में काम करते हैं। अक्सर लाखों रुपये का लेनदेन होता है। इसे लेकर नेत्रपाल का अक्सर विवाद होता रहा है। ऐसे में उसके दुश्मनों की कमी नहीं है। शुक्रवार को ही घटना के बाद मौके पर संवेदना जताने आए एक पूर्व प्रधान को नेत्रपाल ने यह कहकर भगा दिया कि तुम जैसे लोगों की वजह से ही मेरी पत्नी की जान गई है। बाद में नेत्रपाल ने जिन लोगों के खिलाफ तहरीर दी, वह सभी किसी न किसी तरह नेत्रपाल से रंजिश मानते रहे हैं। घटना में इनका हाथ है या नहीं, यह भले ही विवेचना में तय होगा पर यह जरूर तय है कि इस परिवार के संपर्क में रहा कोई शख्स ही घटना का सूत्रधार है।
पूनम के बारे में बताया जाता है कि वह बहुत हिम्मती महिला थी। अक्सर रात को जागकर एकांत में बने घर की निगरानी करना उसका काम था। वह बंदूक भी चलाना जानता थी। शादी की वजह से नाच-गाने और व्यस्तता से वह थक गई और उसे नींद आ गई। हत्यारे शायद यह बात अच्छी तरह जानते थे कि जागते ही पूनम मोर्चा ले लेगी। इसलिए हमलावरों ने लूट से पहले ही उसकी हत्या कर दी।
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बंदूक तोड़कर फेंकी, कारतूस ले गए
पूनम के शव के पास ही दोनाली लाइसेंसी बंदूक को तोड़कर डाल दिया गया था। नेत्रपाल ने बताया कि घर में दो सौ कारतूस थे। इनमें से हमलावर डेढ़ सौ कारतूस ले गए, जबकि पचास तोड़कर डाल गए। नेत्रपाल की लाइसेंसी राइफल उन्हीं के साथ थी। नेत्रपाल का साफ कहना था कि अगर वह या बच्चे घर में होते तो हमलावर उनकी भी हत्या करने से नहीं चूकते।