डाटा एंट्री आपरेटर ने अपने खाते में भेज दी लाभार्थियों की धनराशि
दातागंज। स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर गांव में गरीब लोगों के लिए सरकार की ओर से शौचालय बनाने के लिए धनराशि दी जा रही है। दो किस्तों में यह धनराशि छह-छह हजार रुपये दी जाती है। ब्लाक समरेर मेें संविदा पर तैनात एक डाटा कंप्यूटर ऑपरेटर ने तीन गांवों के चार लाभार्थियों का पैसा उनके खाते में न भेजकर अपने खाते में ही डलवा लिया। मामले के प्रकाश में आने पर डीएम दिनेश कुमार सिंह ने लाभार्थियों का पैसा हजम करने वाले डाटा कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश बीडीओ समरेर को दिए हैं।
हुआ यूं कि इस क्षेत्र के कई लाभार्थी लगातार ब्लाक स्तरीय अधिकारियों के पास पहुंचकर शौैचालय की किस्त नहीं आने की शिकायत कर रहे थे। कुछ लाभार्थियों के खाते बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक शाखा बदायूं के निकले। इस पर बीडीओ अभय प्रताप सिंह को कुछ शक हुआ। उन्होंने सोचा कि लाभार्थी बदायूं क्यों खाते खुलवाएंगे। तब उन्होंने उनके खातों की जांच की तब यह मामला सामने आया कि समरेर क्षेत्र के पप्पू अहमद पुत्र सफी और विजय पुत्र मोहन निवासी खुकड़ी की द्वितीय किस्त, विजय पुत्र मोहन निवासी सराय पस्तौर और कोहनी जाफराबाद के विजय पुत्र प्रमोद की पहली किस्त इन लाभार्थियों के खाते में नहीं पहुंची है। इन सभी की किस्त की धनराशि डाटा कंप्यूटर आपरेटर विनय पुत्र मोरपाल के खाते में गई है।
मामला डीएम और सीडीओ तक पहुंचा। डीएम ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए घपला करने वाले डाटा कंप्यूटर आपरेटर विनय के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश बीडीओ को दिए हैं। बीडीओ ने बताया कि विनय संविदा कर्मी था। उसे हटाया जा चुका है।
वर्जन-
जब तक आधार नाम से मैच नहीं खाता है तब तक पैसा खाते में नहीं पहुंच पाता। उन्हें तब ही शक हुआ था जब इन लाभार्थियों के खाते बदायूं की बैंक के देखे। वाररूम से लाभार्थियों की सूची भी गायब है। आरोपी डाटा कंप्यूटर आपरेटर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। -अभय प्रताप, बीडीओ समरेर
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लाभार्थियों की सूची मिलने पर हो सकता है बड़ा खुलासा
दातागंज। संविदा के डाटा कंप्यूटर आपरेटर द्वारा शौचालय के लाभार्थियों की रकम अपने खाते में डाल लेने का मामला प्रकाश में आने के बाद प्रशासन बेहद सचेत हो गया है। अब सभी लाभार्थियों की सूची को तलाश किया जा रहा है। चर्चा है कि सूची के मिलने के बाद और भी कुछ सामने आ सकता है। इसमें विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आ सकती है।
समरेर क्षेत्र के चार लाभार्थियों की शौचालय की धनराशि डाटा कंप्यूटर आपरेटर विनय ने अपने खाते में डाल ली। पीड़ित लाभार्थी तीन गांव के हैं। डीएम दिनेश कुमार सिंह ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। सो उन्होंने आपरेटर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दे दिए हैं,लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा इस बात पर ही हो रही है कि जरूर इस स्कैंडल में विभागीय कर्मचारियों का खेल रहा है। जो वार रूम से सभी लाभार्थियों की सूची गायब है। दरअसल, एडीओ पंचायत की देखरेख में यह रिकार्ड रखा जाता है। समरेर में तैनात रहे एडीओ का तबादला इस्लामनगर हो चुका है। विकास कार्यालय से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि लाभार्थियों की सूची अब डीपीआरओ कार्यालय में तलाश की जाएगी। लाभार्थियों की सूची मिलने के बाद यह सामने आएगा कि कितने लाभार्थियों की धनराशि इसी तरह गबन की गई है।