बदायूं। मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे पर दो भट्ठा मजदूरों से लूट के मामले को पुलिस ऐसे दबा गई कि जैसे वहां कुछ हुआ ही नहीं था, जबकि पुलिस ने मौके से एक बाइक बरामद की थी, जिस पर फर्जी नंबर पड़े थे। न तो उस बाइक का कुछ पता चला और न ही लुटेरों के बारे में पुलिस कोई खुलासा कर सकी। लोगों का मानना है कि इस मामले में एक सिपाही का नाम प्रकाश में आया था। इससे पुलिस ने घटना को दबाना ही उचित समझा।
पांच दिन पूर्व दो भट्ठा मजदूर बाइक लेकर सैदपुर की ओर लौट रहे थे। उस समय कुछ अंधेरा हो चुका था। दोनों हाईवे पर भोला नाथ की पुलिया के पास पहुंचे थे कि तभी पीछे से आए बाइक सवार तीन बदमाशों ने तमंचे के बल पर उन्हें रोक लिया और मारपीट शुरू कर दी। बदमाशों ने उनसे दस हजार रुपये लूट लिए। मजदूरों के शोर मचाने पर बदमाश बाइक छोड़कर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने जब छानबीन शुरू की तो पता चला कि बरामद बाइक पर किसी दूसरी बाइक के नंबर पड़े थे। लोगों ने बताया था कि जिन लुटेरों ने घटना को अंजाम दिया, उन्होंने कुछ समय पहले ही थाने में तैनात एक सिपाही के साथ खाना खाया था। हाईवे पर वे सिपाही के साथ देखे गए थे।
सूत्रों की मानें तो जब तक सिपाही का नाम प्रकाश में नहीं आया था, तब तक पुलिस कार्रवाई का आश्वासन देती रही लेकिन जैसे ही सिपाही का नाम आया तो पुलिस ने मामले को दबाना ही उचित समझा। यहां तक कि पुलिस ने भुक्तभोगियों को रुपये देकर एनसीआर वापस लेने का लालच भी दिया। उन्हें धमकी भी दी गई कि आगे बोले तो उनके खिलाफ ही रिपोर्ट दर्ज कर ली जाएगी।
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इस मामले में अज्ञात के खिलाफ एनसीआर दर्ज हुई है। अब कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ेगी, तभी आगे की कार्रवाई होगी। सिपाही इसमें शामिल था या नहीं इसका भी पता लगाया जा रहा है।
-डॉ. सुरेंद्र प्रताप सिंह, एसपी देहात