इस्लामनगर थाने के गांव सिठौली से लापता उमेश यादव मामले के वर्कआउट में उलझी सीबीआई ने अब सुरागरसी के लिए पॉलीग्राफी टेस्ट की तैयारी शुरू कर दी है। करीब एक साल पहले जांच एजेंसी ने उमेश यादव का सुराग देने वाले को दो लाख रुपये इनाम देने का एलान किया था। इसके बाद भी कोई ठोस क्लू न मिलने के बाद सीबीआई ने पॉलीग्राफी टेस्ट कराने का फैसला किया है। सूत्रों की माने तो मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ के बाद ऐसे लोगों की सूची भी तैयार कर ली गई है, जिनका टेस्ट कराया जाना है।
इस्लामनगर थाने के गांव सिठौली का उमेश यादव पुत्र चंद्रपाल 31 जुलाई 2014 को लापता हो गया था। उमेश के पिता चंद्रपाल की गांव के ही मनफूल यादव से जमीन को लेकर रंजिश थी। इस विवाद में मनफूल पक्ष के रघुवीर की हत्या कर दी गई थी। हत्या के इस मामले में चंद्रपाल और उमेश को कोर्ट ने सजा सुनाई थी। पिता-पुत्र के जेल जाने के बाद मनफूल ने उनकी 26 बीघा जमीन पर कब्जा कर लिया। बाद में चंद्रपाल और उमेश को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। दोनों पक्षों के बीच रंजिश कायम रही। उमेश यादव के अचानक लापता होने के बाद उसकी मां सत्यवती ने थाने में तहरीर दी। पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर ली। बाद में कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने उमेश यादव के अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया। विवेचना में मनफूल उसके बेटे अवधेश, विजय समेत गांव के ही मदन और लोचन के नाम प्रकाश में आए। इसके बाद भी कार्रवाई न होने पर सत्यवती ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने फरवरी 2016 में इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया। सीबीआई ने मामले में रिपोर्ट दर्ज करने के बाद उमेश का सुराग देने वाले को दो लाख रुपये के इनाम का भी एलान किया। इसके बावजूद उमेश के बारे में जांच एजेंसी को अब तक कोई ठोस क्लू नहीं मिला है। ऐसे में, सीबीआई ने अब मामले से जुड़े लोगों का पॉलीग्राफी टेस्ट कराने का फैसला किया है।