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पुलिस से क्लीनचिट मिलने के बाद धंधेबाजों ने ठिकाने लगाया तेल

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उझानी (बदायूं)। केरोसिन भरे चार ड्रमों को पकड़कर छोड़ दिए जाने के मामले में एक बात तो साफ हो गई है कि धंधेबाजों पर अब शायद ही कोई कार्रवाई अमल में लाई जाए। धंधेबाजों के तार केरोसिन माफिया से जुड़े हैं या फिर धंधेबाज खुद ही मोटे मुनाफे के लिए कोटेदारों के जरिये खेल को अंजाम दे रहे हैं, यह भी सामने आने से रह गया।
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रविवार को केरोसिन भरे चार ड्रमों को पकड़े जाने और फिर धंधेबाजों को क्लीनचिट देने का सबसे बड़ा फायदा बिल्सी क्षेत्र के उस कोटेदार को मिल गया है जहां से धंधेबाजों ने केरोसिन खरीदा था। बताते हैं कि वह कोटेदार पहले भी धंधेबाजों को केरोसिन मुहैया कराता रहा है। वह अकेला ऐसा कोटेदार है जो ब्लैकियों के चंगुल में हो, यह भी नहीं हो सकता। धंधेबाज इलाके समेत आसपास के कोटेदारों से भी केरोसिन खरीदते होंगे। जानकारों की मानें तो धंधेबाजों पर समुचित कार्रवाई होती तो केरोसिन की ब्लैक की हकीकत सामने आ जाती। चूंकि मामला दो तहसील क्षेत्रों से जुड़ा है, इस कारण भी कोई अफसर जिम्मेदारी लेना नहीं चाहता। केरोसिन के छोटे-मोटे धंधेबाज तो नगर में भी हैं। वह ड्रमों से नहीं बल्कि 20-25 लीटर की केन के जरिये केरोसिन इकट्ठा करके धंधेबाजों को मुहैया कराते रहते हैं।
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धंधेबाजों ने कटरी के गांवों को बनाया ठिकाना
उझानी। केरोसिन की ब्लैक करने वालों के तार कटरी के गांवों से जुड़े हैं। कटरी के कुछ गांवों में केरोसिन के ड्रमों को इकट्ठा करके उन्हें धंधबाजों के जरिये ग्राहकों तक उपलब्ध कराया जाता है। धंधेबाज पड़ोसी जिला एटा और कासगंज तक केरोसिन मुहैया कराते हैं। डीजल के स्थान पर पंपिंग सेट में इसका इस्तेमाल उस समय से ज्यादा बढ़ा है जब से डीजल पर महंगाई बढ़ी है। केरोसिन का इस्तेमाल शादी-समारोह में जनरेटर में भी होने लगा है।
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