बदायूं। बाल मन को कब क्या अच्छा और क्या खराब लग जाए, कहा नहीं जा सकता। शहर निवासी ट्रांसपोर्टर के बेटे मयूर के साथ भी ऐसा ही हुआ। पापा की डांट से नाराज होकर मयूर हीरो बनने की तमन्ना लिए मुंबई जा रहा था। सोच था कि खूब पैसे कमाएगा और पापा की शिकायत दूर कर देगा। हालांकि मध्यप्रदेश से गुजरते हुए उसे परिवार की याद आई और ट्रेन से उतर गया। वहां एक नेक इंसान शेर खान की बदौलत वह परिवार को मिल गया।
कर्मचारी नेता रहे मोहन स्वरूप गुप्ता का पोता मयूर गुप्ता बुधवार की शाम अपने आवास विकास स्थित घर से कोचिंग को कहकर निकला और नहीं लौटा। घरवालों ने गुरुवार को सिविल लाइंस थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। चूंकि मयूर के पास मोबाइल नहीं था, इसलिए पुलिस भी बेबस थी। शुक्रवार तड़के मयूर के पिता ट्रांसपोर्टर धवन गुप्ता के मोबाइल पर कॉल आई। उधर से बताया गया कि शेरगढ़ से शेरू खान बोल रहे हैं। आपका बेटा मध्यप्रदेश के मंसौर जिला अंतर्गत श्यामगढ़ के रेलवे स्टेशन पर रोता हुआ मिला है। आप कहें तो इसे घर ले जाएं, या फिर जीआरपी को दे दें। धवन ने बात कराने को कहा तो दूसरी ओर से मयंक सुबक रहा था। धवन के कहने पर शेर खान ने मयूर को जीआरपी श्यामगढ़ के हवाले कर दिया। धवन गुप्ता ने सिविल लाइंस पुलिस की मदद से जीआरपी श्यामगढ़ से संपर्क साधकर तस्दीक कर ली और शेर खान को मदद के लिए शुक्रिया बोला। इसके बाद वह अपने कुछ साथियों के संग एमपी रवाना हो गए। वहां शाम के वक्त मयूर से उनकी मुलाकात हुई तो वह फफकर रोने और गलती के लिए माफी मांगने लगा। धवन ने भी गले लगाकर बेटे को माफ कर दिया। पिता-पुत्र वहां से चल दिए हैं और शनिवार सुबह तक बदायूं लौट आएंगे।