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हुसैनपुर में हालात समान्य होने पर पीएसी को हटाया

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crime scene
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उझानी (बदायूं)। हुसैनपुर खेड़ा के सुखपाल कश्यप की हत्या के मामले में नामजदों की गिरफ्तारी नहीं होने से मृतक के घरवालों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाया है। आरोप है कि पुलिस नामजदों पर शिकंजा कसने में नाकाम रही है। इधर हालात सामान्य हो जाने के बाग गांव में तैनात पीएसी को हटा लिया गया है।
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कोतवाली क्षेत्र के गांव हुसैनपुर खेड़ा निवासी सुखपाल कश्यप की 17 अक्तूबर को गंगा नहाकर लौटते समय हत्या कर दी गई थी। मृतक के भाई पप्पू ने घटना में प्रधान पति पूर्व सैनिक पुरुषोत्तम उर्फ पप्पू, ओमपाल, विजय, रेशू और दलवीर को नामजद कराया था। मृतक के भाई का कहना है कि पुलिस नामजदों की गिरफ्तारी करने में नाकाम साबित हुई है। इससे उन्हें जान माल का खतरा बना हुआ है। बताते हैं कि पुलिस ने नामजदों पर शिकंजा कसने की नीयत से चार दिन पहले आरोपियों के दो परिवार वालों को हिरासत में भी लिया था लेकिन नामजदों तक पहुंचने में उसे सफलता नहीं मिल पाई।
बता दें कि ठाकुर और कश्यप पक्ष के दो गुटों में पिछले एक दशक से चली आ रही रंजिश में अब तक दोनों पक्षों के तीन लोगों की हत्या हो चुकी है। जातीय तनाव के मद्देनजर अफसरों के निर्देश पर घटना के अगले दिन ही गांव में पीएसी भी तैनात कर दी गई थी। चौकी इंचार्ज प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि गांव में हालात पूरी तरह सामान्य हैं। इसी के चलते पीएसी को हटा लिया गया है। नामजदों को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
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पुलिस को मेहरबान के लौटने का इंतजार
उझानी। कछला के वार्ड नंबर-चार के मुरावननगला निवासी मेहरबान सिंह के घर में 23 अक्तूबर की रात घुसे अज्ञात बदमाशों ने विरोध करने पर गृहस्वामी को गोली मार कर घायल कर दिया था। घायल मेहरबान का अभी बरेली में इलाज चल रहा है। पुलिस मामले में अज्ञात बदमाश के खिलाफ जानलेवा हमले की रिपोर्ट भी दर्ज कर चुकी है लेकिन तहीकाकात में अब तक कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है। रंजिश के पहलू पर भी जांच शुरू कर दी गई है। चौकी इंचार्ज का कहना है कि घायल मेहरबान के घर लौटने पर जांच के दायरे को बढ़ाया जाएगा।
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