प्रभारी डीजीसी (क्रिमनल) साधना शर्मा के ‘एक्सीडेंट केस’ से सोमवार को पर्दा उठ गया। साधना की हत्या साजिश का हिस्सा थी। लाखों रुपये और प्लॉट हड़पने के लिए उनके करीबी भाजपा नेता पीसी शर्मा ने विकास भवन के बाबू गिरीश चंद्र मिश्रा के जरिए मुजरिया क्षेत्र के हार्ड क्रिमनल मस्ताना से मिलकर हत्या कराई थी। घटना में पीसी शर्मा समेत आठ लोग शामिल रहे। घटना से पांच महीने पहले ही 4.5 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी। गिरफ्तार बाबू और टवेरा मालिक को पूछताछ के बाद कोर्ट में पेश किया गया। बाद में दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
पुलिस ने साधना शर्मा की हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए मोहल्ला बहादुरगंज निवासी गिरीशचंद्र मिश्रा उर्फ नीरज और बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव बेहटा गुसाई निवासी राजू पुत्र कल्लू को गिरफ्तार किया था। राजू टवेरा का मालिक है, तो गिरीश विकास भवन में बाबू है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में राजू और गिरीश ने पूरे घटनाक्रम को उजागर कर दिया। प्रेमचंद्र शर्मा (पीसी शर्मा ) को गिरीश बहनोई मानता था। पीसी पर साधना शर्मा की मोटी रकम थी। साधना ने पीसी के साझे में प्लॉट भी खरीदे थे। रुपये और प्लॉट हड़पने के लिए पीसी ने गिरीश से सौदा किया था कि वह साधना की हत्या करा दे। गिरीश ने पुलिस को बताया कि साढ़े चार लाख रुपये में उसने मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव भीकमपुर निवासी अब्दुल गनी उर्फ मस्ताना को साधना की सुपारी दे दी।
उसने बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव बेहटा गुसाई निवासी टवेरा मालिक राजू को दो लाख रुपये का लालच देकर पटा लिया। टवेरा से 23 मई को स्कूटी सवार साधना की टक्कर मारकर हत्या की गई, तब टवेरा को बेहटा गुसाई का इशरत उर्फ कल्लू चला रहा था। घटना में मुजरिया के गांव नगला सलारपुर पिंटू उर्फ मुनेंद्र और बिल्सी थाना क्षेत्र के ही गांव परौली निवासी यासीन और मोहब्बत उर्फ साजिद भी शामिल था। पुलिस ने टवेरा भी बरामद कर ली है। सोमवार को पुलिस ने गिरीश और राजू को कोर्ट में पेश किया। जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया। बता दें कि प्रभारी डीजीसी साधना शर्मा की हत्या में उनकी बहन विपर्णा गौड़ ने पूर्व विधायक योगेंद्र सागर समेत छह लोगों को नामजद कराया था।
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नामजद लोग जांच के दायरे में बरकरार
उझानी। प्रभारी डीजीसी साधना शर्मा की हत्या में विपर्णा की ओर से नामजद कराए गए पूर्व विधायक योगेंद्र सागर, श्रवण गुप्ता, मुन्ना उर्फ विजेंद्र नाथ शर्मा, कमल शर्मा, सुधांशु और भूरे के बारे में कोतवाल गोपीचंद्र यादव ने बताया कि वर्कआउट के दौरान जो नाम सामने आए हैं, उनमें अभी छह आरोपियों की गिरफ्तारी होनी बाकी है। गिरफ्तारी के दौरान उनसे भी पूछताछ होगी। इसीलिए विपर्णा द्वारा नामजद कराए गए लोगों को अभी क्लीन चिट नहीं दी जा सकती। फिलहाल उन्हें जांच के दायरे में रखा गया है।
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ये खुलासा पूरी तरह फर्जी है। मुझे फंसाने का काम किया जा रहा है। साधना शर्मा ने मुझे सरवाइव किया था, उनकी मौत से मैं खुद हैरान रह गया था। ये सियासी साजिश है, जो पुलिस के साथ मिलकर रची गई है। इस मामले में नारको से लेकर जितने भी टेस्ट होते हों, करा लिए जाएं, मैं तैयार हूं। अगर मैं निर्दोष साबित हुआ तो उनको भी सजा मिले जिन्होंने ये ड्रामा रचा है।
-पीसी शर्मा, भाजपा नेता