ग्यारह दिनों से लापता हरहरपुर निवासी नारायण राजपूत बुधवार रात पानीपत (हरियाणा) की गत्ता फैक्ट्री में काम करते मिल गया। पूछताछ में उसने जो बताया, उससे साफ हो गया कि परिजनों से मशविरा कर नारायण ने अपने भाई के ससुराल वालों को फंसाने के लिए ड्रामा किया था। उसे बरामद करने के बाद एसएसपी अशोक कुमार के सामने पेश किया गया । एसएसपी ने भी उससे पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। सर्विलांस की मदद से हकीकत सामने लाने वाली पुलिस टीम की भी उन्होंने सराहना की। पुलिस टीम ने बरामद राजपूत तक पहुंचाने में मददगार बने हरहरपुर के ही रवि को गुरुवार दोपहर सिविल लाइंस थाने में मौजूद एसएसपी अशोक कुमार के सामने पेश किया। एसएसपी के सामने नारायण राजपूत ने हकीकत बयां कर दी। एसएसपी के मुताबिक, नारायण राजपूत 25 नवंबर की देर शाम अपने खेत से लापता हो गया। एक सोची-समझी रणनीति के तहत लापता हुए इस युवक का अपहरण बताते हुए उसके पिता सुंदरलाल ने बड़े बेटे रनवीर के ससुराल वालों में कासगंज जिले के सोरों में मोहल्ला कायस्थान निवासी शंभू और उसके बेटे मुकेश को शक में नामजद करा दिया। रनवीर समेत उसके परिजनों पर दहेज उत्पीड़न का केस चल रहा है। उनकी मंशा रही कि अपहरण में फंस जाने के बाद रनवीर के ससुराल वालों से दहेज उत्पीड़न के केस में समझौता हो जाएगा लेकिन नारायण के दोस्त रवि जब सर्विलांस के दायरे में आया तो पकड़े जाते ही उसने पोल खोल दी। रवि ने नारायण के पानीपत की फैक्ट्री में छोटे के नाम से काम करने की जानकारी दी।
नारायण ने इस दौरान अपने परिजनों और रवि से मोबाइल पर कई बार बात भी की। पुलिस रवि को साथ लेकर पानीपत पहुंची। एसएसपी ने स्पेशल टीम के इंस्पेक्टर रामगोपाल शर्मा और कोतवाली के दरोगा रामऔतार की तारीफ की।
रनवीर के ससुराल वालों को क्लीनचिट, षड्यंत्रकारी पिता समेत पांच नामजद
उझानी। हरहरपुर के नारायण राजपूत के कथित अपहरण का मामला वर्कआउट हो जाने के बाद कोतवाली पुलिस ने षड्यंत्रकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। पुलिस को गुमराह कर ड्रामा करने के मामले में नारायण, उसके पिता सेवानिवृत्त रेलकर्मी सुंदरलाल, भाई रनवीर, दोस्त रवि और बहनोई हरीसिंह को 120 बी, 195/ 419 आईपीसी में नामजद किया गया है। इसी के साथ शंभू और उसके बेटे मुकेश को क्लीनचिट दे दी गई है। शंभू और मुकेश तीन-चार दिन तक कोतवाली पुलिस की हिरासत में रहे थे। कोतवाल विनोद कुमार ने बताया कि घटना के अगले दिन से ही नारायण के परिजनों ने पुलिस को गुमराह करना शुरू कर दिया था। सबसे अहम बात तो यह कि नारायण और उसके दोस्त के बीच दो-तीन बार वीडियो कॉल भी हुई थी।