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सीओ सिटी का ट्रैफिक मिशन शुरू, एक फर्जी बस पकड़ी

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बदायूं। शहर में आए दिन लगने वाले जाम से निजात दिलाने को सीओ सिटी ने एक ट्रैफिक मिशन शुरू किया है। शनिवार दोपहर उन्होंने रोडवेज और प्राइवेट बस स्टैंड पहुंच कर आस-पास के ठेले खोमचे वालों को चेताया। साथ ही बस यूनियन के पदाधिकारियों को चेतावनी दी कि अगर स्टैंड के बाहर रोड पर कोई प्राइवेट खड़ी मिली तो सीधे सीज की जाएगी। इस दौरान रोड पर खड़ी उत्तर प्रदेश परिवहन लिखी फर्जी रोडवेज बस भी पकड़ी गई। बस को कब्जे में लेकर सिविल लाइंस थाना भेज दिया गया है।
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एसएसपी अशोक कुमार के निर्देश पर शनिवार दोपहर करीब दो बजे प्राइवेट बस स्टैंड पहुंचे सीओ सिटी राघवेंद्र सिंह राठौर और सीओ उझानी भूषण वर्मा ने सबसे पहले प्राइवेट बस यू्नियन के पदाधिकारियों को बुलाया। उसहैत बस यूनियन के अध्यक्ष हसन खान और उसावां यूनियन के अध्यक्ष विनोद शर्मा को बताया कि आज के बाद जो भी प्राइवेट बसें आएंगी, वह स्टैंड के अंदर ही सवारियों को बैठाएंगी। अगर कोई बस सड़क पर सवारी बैठाती पाई गई तो उसको सीज किया जाएगा। जाम की स्थिति बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान रोडवेज चौराहे पर उत्तर प्रदेश परिवहन लिखी एक बस सवारियों को बैठा रही थी। जैसे ही दोनों अधिकारी प्राइवेट बस स्टैंड से चौराहे की ओर बढ़े कि उसका हेल्पर उतरकर भाग गया। शक होने पर पुलिस ने उसके ड्राइवर को पकड़ लिया। पूछताछ में पता चला कि यह बस कभी परिवहन निगम में चलती थी। अनुबंध खत्म होने के बावजूद यह बस उसी तरह दौड़ रही है। परिचालक के पास टिकट काटने की मशीन भी थी। सीओ सिटी ने पूरी छानबीन करने के बाद बस को कब्जे में लेकर थाने भिजवा दिया। साथ ही बस नंबर के आधार पर कार्रवाई शुरू करा दी।
सीओ सिटी राघवेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि शहर में जाम लगने के कई कारण हैं। एक तो सड़क पर आ रहे बिजली के पोल साइड से लग जाएं, दूसरा यह कि फुटपाथ घेरे दुकानदारों पर नगर पालिका प्रशासन कार्रवाई करे। जो सड़कें टूटी पड़ी हैं, उन्हें पीडब्ल्यूडी विभाग मरम्मत कराए। अगर बाईपास पर सोत नदी की पुलिया तैयार हो जाए तो बड़े वाहन शहर में नहीं आएंगे। वहीं परिवहन निगम अपना वर्कशॉप यहां से हटा दे तो जाम की समस्या पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। पुलिस विभाग अपना कार्य तेजी से कर रहा है।
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...तो और भी चल रहीं होंगी फर्जी रोडवेज बस
शनिवार को पकड़ी गई बस से बड़ी करतूत उजागर हुई है। जो बस पकड़ी गई है, उसके परिचालक पर बाकायदा मशीन थी। उसी से यात्रियों के टिकट काटे जा रहे थे। एक व्यक्ति ने बताया कि ऐसी मशीनें रोडवेज विभाग ही उपलब्ध कराता है। इसके लिए बस के चालक और परिचालक को महीना देना होता है। रोडवेज विभाग के एक कर्मचारी की माने तो इस तरह की कई बसें यहां चल रहीं हैं।

बदायूं डिपो की नहीं है बस: एआरएम
एआरएम राजेश कुमार से बस पकड़े जाने के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि यह बस बरेली डिपो की है। जब उन्हें बताया कि बस के आगे बदायूं लिखा है, ऊपर उत्तर प्रदेश परिवहन लिखा है और उसका यह नंबर है तो वह बोले यह बस बदायूं डिपो की नहीं है।
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