बदायूं। ट्रैक्टर खरीदने को दहेज में एक लाख रुपये नहीं देने पर विवाहिता की गला घोटकर हत्या के मामले में आरोपी सास-ससुर को जिला एवं सत्र न्यायाधीश नसीर अहमद द्वितीय ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों पर चार-चार हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है। जबकि मृतका के पति के नाबालिग होने पर उसका केस किशोर न्याय बोर्ड में लंबित है।
विवाहिता को मार डालने की यह घटना थाना कुंवरगांव क्षेत्र के गांव मडिया भांसी में 15 जून 2010 को घटी थी। बरेली जिले केे थाना भमोरा निवासी दलीपपुर निवासी हरीराम ने 16 जून को थाना कुंवरगांव में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने अपनी पुत्री देवीवती की शादी मडिया भांसी निवासी रामचंद्र के पुत्र के साथ की थी। आरोप था कि ससुराल वाले देववती को दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे। ट्रैक्टर खरीदने को एक लाख रुपये की उनसे मांग की गई थी। नहीं देने पर ससुराल वालों ने देववती को 15 जून को रस्सी से गला घोटकर मार डाला। गांव के ही किसी व्यक्ति ने उन्हें इसकी सूचना दी थी। जब वह गांव पहुंचे तो आरोपी फरार थे।
हरीराम ने बताया था कि आरोपी उसकी बेटी के छह माह के बच्चे को ले गए। हरीराम ने इस मामले में पति, सास मोरकली और ससुर रामचंद्र के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
विद्वान न्यायाधीश नसीर अहमद द्वितीय ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी अनिल सिंह राठौर और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद दहेज हत्या में नामजद आरोपी सास मोरकली और ससुर रामचंद्र को उम्रकैद की सजा सुनाई। दोनों पर चार-चार हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है। बता दें कि मुकदमे के दौरान यह पाया गया कि पति नाबालिग है सो उसका केस किशोर न्याय बोर्ड को स्थानांतरित कर दिया गया। जो लंबित है।