बदायूं/ बिनावर। जिले में पोषाहार की कालाबाजारी चरम पर है। सहसवान परियोजना के बाद अब समरेर परियोजना का नाम भी इसमें शामिल हो गया। हालात ये हैं जो पोषाहार बच्चों व गर्भवती महिलाओं को मिलना चाहिए, उसे पशु मालिकों के लिए बेचा जा रहा है। गांव वालों की सूचना पर रविवार को बमियाना केंद्र का 15 कट्टे पोषाहार यूपी 100 ने पकड़ लिया। सूचना पर पहुंचे डीपीओ ने पोषाहार आंगनबाड़ी को सौंप दिया, साथ ही इसकी जांच शुरू करने की बात कही।
रविवार को समरेर परियोजना क्षेत्र के गांव बमियाना से पोषाहार के करीब 15 कट्टे आंगनबाड़ी द्वारा वितरण न करके ब्लैक में बेचने की शिकायत की गई। इस पर यूपी 100 ने मौके पर जाकर पोषाहार को पकड़ लिया और बिनावर थाना पुलिस के हवाले कर किया। चूंकि मामला पोषाहार से जुड़ा था, तो इसकी सूचना प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी पीके दास को दी गई। वह तुरंत ही वहां पर पहुंच गए। बताते हैं कि प्रभारी डीपीओ ने शिकायतकर्ता की एक नहीं सुनी और आंगनबाड़ी को पोषाहार देकर मामला रफा दफा कर दिया। लोगों का आरोप है कि ये पोषाहार बेचने के लिए ले जाया जा रहा था। इससे लोगों में विभागीय अधिकारी के खिलाफ रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि प्रभारी डीपीओ द्वारा आंगनबाड़ी का पक्ष लेना संदेह के घेरे में आता है।
एक सहायिका के यहां से पोषाहार दूसरे केंद्र पर ले जा रहे थे। इसमें ऐसी कोई बात नहीं है, जो बेचने वाली हो। किसी ने रंजिश के चलते ये शिकायत की है।
-विभा वर्मा, प्रभारी सीडीपीओ, समरेर।
प्रथम दृष्टया ये मामला बेचने का नहीं लग रहा है। एक आंगनबाड़ी पर दो जगह का चार्ज था। वह एक सेंटर से दूसरे सेंटर पर पोषाहार ले जा रही थी। ठेकेदार द्वारा एक ही सेंटर पर दोनों जगहों पर पोषाहार कैसे दे दिया गया, इसकी जांच की जाएगी कि किस स्तर से ये कमी हुई है।
- पीके दास, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी।