गैंगरेप के चार मुजरिमों को फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश परवेंद्र कुमार शर्मा ने 20-20 साल कड़ी कैद की सजा सुनाई है। साथ ही चारों पर 52 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। पांचवें मुल्जिम रहे एक व्यक्ति की मुकदमा चलने के दौरान मौत हो चुकी है।
संभल जिले के थाना धनारी क्षेत्र के एक गांव की महिला ने चार जुलाई 2013 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका छह वर्षीय पुत्र गांव स्थित हैंडपंप पर पानी भरने गया था। वहां पर उसके पुत्र की आरोपी बनवारी की भतीजी ने पिटाई की थी। वह इसकी शिकायत करने गई तो बनवारी ने उल्टे उसे लात-घूंसों से पीटा। 11 जून 2013 को वह घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने थाने जा रही थी। तभी रास्ते में उसे शाम करीब छह बजे कौआखेड़ा-छपरा गांव के पास बाग में पांच लोगों ने घेर लिया। उसे सभी ने मारापीटा और गैंगरेप किया। इतना ही नहीं बाद में मुल्जिमों ने उसे गांव छोड़ने पर मजबूर कर दिया। वह अपने मायके जाकर रहने लगी तो मुल्जिम तरह-तरह की धमकी देते रहे।
वादिनी की ओर से बनवारी, भूरे पुत्र रक्षपाल, रामप्रकाश पुत्र करन सिंह, वीरपाल पुत्र बंतू सिंह और छोटे पुत्र पन्ना लाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश परवेंद्र कुमार शर्मा ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से प्रभारी डीजीसी मुकेश बाबू यादव और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद गैंगरेप में रामप्रकाश, वीरपाल, भूरे और छोटे को दोषी पाते हुए 20-20 साल कैद की सजा सुनाई। साथ ही सभी पर 52 हजार रुपये जुर्माना लगाया। इस धनराशि के जमा होने पर वादिनी को 46 हजार रुपये देने के भी आदेश दिए हैं। पांचवें मुख्य आरोपी बनवारी की दौरान-ए मुकदमा मौत हो गई थी।