बदायूं। अवैध असलहे पकड़े जाने के मामले में डीआईजी के पास सारे तथ्य पहुंच चुके हैं। ऐसे में पुलिस को बड़ी रकम देने वाले आरोपियों और रकम लेकर आरोपियों को छोड़ने वाले पुलिस अधिकारियों में खलबली मच गई है। डीआईजी द्वारा जांच शुरू किए जाने की बात पता चलते ही ऐसे लोग सफेदपोशों की शरण में जा पहुंचे है, ताकि उच्चाधिकारियों पर दबाव बनाया जा सके। हालांकि, यदि जांच सही तरीके से हुई तो यह भी तय है कि इसमें कई लोगों पर गाज गिरेगी। विगत दो नवंबर को पुलिस ने एक नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन के नौकर समेत नौ लोगों को दबोचा था, जबकि एक को फरार दिखाया गया था। उनके पास बिहार के मुंगेर में बनी आठ पिस्टल और 38 कारतूस बरामद हुए थे। पुलिस ने पूर्व चेयरमैन और उनके बेटे को भी हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में दोनों को छोड़ दिया गया। मामले की परतें खुली तो एडीजी प्रेमप्रकाश ने इसकी जांच डीआईजी राजेेश कुमार पांडेय को सौंप दी। उन्होंने इससे जुड़े सारे तथ्य अब अपने यहां मंगा लिये हैं। इससे डरे आरोपी और स्थानीय अधिकारी सत्ताधारी कुछ बड़े नेताओं से संपर्क साधने में लग गए हैं।
मामला खुला तो नालों में फेंक दिए गए हथियार
मामला खुलने के बाद पिस्टल खरीदने वाले इतने डर गए कि उन्होंने नालों में पिस्टल फेंक दी। एक व्यापारी नेता और एक डॉक्टर समेत कई लोगों ने इसी तरह से इन पिस्टलों से अपना पीछा छुड़ाया। सूत्रों के मुताबिक इस गोरखधंधे के खुलने से पहले ये लोग इन पिस्टलों का लाइसेंसी बताकर दूसरों पर रौब गालिब किया करते थे।
घटना के बारे में एफआईआर, केस डायरी समेत सभी तथ्य हमने मंगा लिए हैं। चूंकि मामला गंभीर है इसलिए सारे सुबूतों के आधार पर ही गहनता से जांच की जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- राजेश कुमार पांडेय, डीआईजी, बरेली