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अपहरण व हत्या के मामले में दो भाइयों सहित चार को उम्रकैद

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बदायूं। अपहरण कर हत्या करने के सोलह साल पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/स्पेशल जज एससी एसटी एक्ट अशोक कुमार ने चार अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। चारों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है। इस मामले में नामजद तीन अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया है। दो आरोपियों की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो चुकी है।
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हत्या, अपहरण का मामला थाना दातागंज के गनगोला गांव निवासी वादी मलखान पुत्र ख्यालीराम ने 24 अप्रैल 2003 को दर्ज कराया था। रिपोर्ट के मुताबिक उसका पुत्र छब्बू रात को खेत से आ रहा था। रास्ते में अज्ञात लोगों ने पुत्र का अपहरण कर लिया। वादी मलखान को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर कहा कि शाहजहांपुर के थाना परौर में अपनेराम की मढ़ी पर जाओ। वहीं पर तुम्हारा अपहृत पुत्र मिल जाएगा। वादी दूसरे पुत्र बिजेंद्र और एक अन्य व्यक्ति को लेकर गया तो बदमाशों ने उसे उसके अपह्रत पुत्र से मिलवाया। छब्बू ने बताया कि गांव के ही रमेश, श्यामपाल, रामपाल और श्रीराम ने उसका अपहरण कराया है। इसी बात से नाराज होकर बदमाशों ने उसके दूसरे भाई विजेंद्र को भी पकड़ लिया और वादी से कहा कि अब एक लाख 20 हजार रुपये लाकर दोगे तब तुम्हारे पुत्र को छोड़ेंगे। बाद में बदमाशों ने उसके बड़े पुत्र छब्बू की हत्या कर दी जबकि छोटे पुत्र विजेंद्र को छोड़ दिया है। इसके बाद उसने शाहजहांपुर के थाना परौर कुढ़रिया निवासी कल्लू व अतरपाल पुत्रगण रामलाल, थाना दातागंज के गांव बौरा निवासी सुरेश पुत्र सरदार, बेचे पुत्र रामसरन, गनगोला निवासी नन्हे पुत्र पोथीराम, रमेश व श्रीराम पुत्रगण सुखपाल, श्यामपाल व रामपाल पुत्रगण सुखराम को अपने पुत्रों के अपहरण कर एक की हत्या करने के मामले में नामजद कराया। पुलिस ने कल्लू, अतरपाल, सुरेश और बेचे के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। वादी ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर रिपोर्ट में नामजद बाकी आरोपियों को भी तलब कर आरोपी बनाया। मुकदमे के दौरान श्यामपाल और रामपाल की मृत्यु हो गई।
स्पेशल जज अशोक कुमार ने अभियोजन की ओर से एडीजीसी रईस अहमद और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद छब्बू का अपहरण कर हत्या के मामले में मुजरिम करार देते हुए चारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, साथ ही चारों पर 20-20 हजार का जुर्माना डाला। कोर्ट ने नन्हे, रमेश और श्रीराम को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
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