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खंड विकास अधिकारी की जांच आख्या को नकारते हुए

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बिसौली। यहां खंड विकास अधिकारी की जांच आख्या को नकारते हुए अपात्र को कोटेदार बना देने का मामला सामने आया है। जिससे ग्रामीणों में रोष है।
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तहसील क्षेत्र के ग्राम जगतपीपरी में आठ मई 2017 को कोटे का प्रस्ताव ग्राम पंचायत की खुली बैठक में कोटेदार परवेज खां के पक्ष सर्वसम्मति से होना दर्शाया गया। दूसरे पक्ष के जहीर खां ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया कि बैठक एकतरफा की गई और उसके पक्ष के लोगाें की गिनती नहीं की गई। इस पर जिलाधिकारी ने जांच के आदेश एसडीएम बिसौली को दिए। जिन्होंने खंड विकास अधिकारी बिसौली बृजमोहन अंबेड को जांच अधिकारी बनाकर गांव भेजा। उन्होंने अपनी जांच आख्या में स्पष्ट कहा है कि आठ मई को हुई ग्राम पंचायत की बैठक में विधिवत प्रक्रिया को नहीं अपनाया गया। श्री अम्बेड ने अपनी आख्या में कहा है कि जब किसी प्रक्रिया में दो उम्मीदवार भाग लेते हैं तब या तो एक उम्मीदवार अपनी उम्मीदवारी वापस ले या फिर निर्णय बहुमत से किया जाय। यहां दो उम्मीदवार परवेज खां व जहीरखां ने भाग लिया। लेकिन यहां न तो दूसरे उम्मीदवार की उम्मीदवारी वापस हुई और न ही निर्णय बहुमत से हुआ। साथ ही पंचायत का कार्यवाही रजिस्टर बिल्कुल नया था जिस पर प्रधान या सचिव के हस्ताक्षर नहीं थे। उन्होंने अपनी आख्या में यहां तक कहा है कि इस बैठक से पूर्व तीन मई को इसी संबंध में बैठक स्थगित की गई थी। इस स्थगन कार्यवाही और चार मई को निकाले गए एजेंडा रजिस्टर पर भी किसी अधिकृत पदाधिकारी सचिव या प्रधान के हस्ताक्षर नहीं हैं। बैठक में कौन कौन मौजूद था इसका भी जिक्र नहीं किया गया है। अपनी आख्या के अंत में खंड विकास अधिकारी ने लिखा है कि समस्त दस्तावेज मनमाने तरीके से तैयार करके प्रक्रिया को विधिवत रूप देने की कोशिश की गई तथा कूटरचित तरीके से अभ्यर्थी विशेष के पक्ष में प्रस्ताव किया गया। यह जानकारी दूसरे उम्मीदवार जहीर खां को सूचना के अधिकार अंतर्गत सूचना मांगने पर मिली है। जहीर खां ने बताया कि इस नियुक्ति में इतनी बड़ी धांधली हुई है ऐसी उम्मीद नहीं थी। खंड विकास अधिकारी की आख्या पर ध्यान नहीं दिया जाएगा ऐसा तो सोच भी नहीं जा सकता। मामला मुख्यमंत्री के दरबार में ले जाना पडे़ या फिर उच्च न्यायालय जहां भी आवश्यकता होगी जाऊंगा। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से सही कोटेदार की नियुक्ति की मांग की है। पूर्ति निरीक्षक तरमीम अहमद ने बताया कि इस बारे में नायब तहसीलदार की ओर से दोबारा जांच आख्या दी गई थी जिसके आधार पर कोटेदार को दुकान दी गई है। जबकि जहीर खां का आरोप है कि नायब तहसीलदार ने कोई जांच ही नहीं की।
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