...तो बीड़ी, तंबाकू के साथ जेल में पहुंची पिस्टल!
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, किसने खोले बैरक के ताले?
जेल प्रशासन की मिलीभगत का शक गहराया
जेल अधिकारियों के मुताबिक बैरक बंद होने के समय भागे थे बंदी
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं।
नियमों के मुताबिक चलें तो जिला जेल के अंदर कोई बाहरी व्यक्ति एक छोटी वस्तु भी नहीं ले जा सकता। सबसे पहले उसकी तलाशी होती है। उसकी खाने-पीने की वस्तुओं को चेक किया जाता है। तब कहीं उसकी जेल में इंट्री होती है। ऐसे में जेल के अंदर कारतूस और मैग्जीन के साथ पिस्टल का पहुंचना किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा संभव नहीं है। ऐसे में कोई न कोई व्यक्ति या कर्मचारी ऐसा है जो जेल से जुड़ा है, जिसने बंदियों तक पिस्टल पहुंचाई और बैरक के ताले खोले।
जिला जेल के अंदर बीड़ी, तंबाकू और शराब पहुंचती है, इसका खुलासा तो पिछले दिनों कोर्ट परिसर के लॉकअप में कैदियों के भिड़ने पर हो गया था। उस समय कुछ कैदियों ने जेल प्रशासन पर आरोप लगाया था कि गिने-चुने कैदियों को हर सुख सुविधाएं मुहैया कराई जा रहीं हैं। इसके बदले कैदी मोटी रकम खर्च करते हैं। यहां तक कि बंदी रक्षक बीड़ी, तंबाकू और शराब तक पहुंचाते हैं। एसएसपी अशोक कुमार ने इस मामले को संज्ञान में लेकर तुरंत जांच के आदेश दिए थे। वहीं सीओ सिटी वीरेंद्र सिंह यादव ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच की थी। तब से लेकर अब तक वह जांच लंबित पड़ी है। अगर उस जांच को पूर्ण कर लिया जाता तो आज पुलिस विभाग को पता चल जाता कि जेल के अंदर क्या-क्या सामान पहुंचता है।
शनिवार रात बंदी सुमित के फरार होने और चंदन के भागने में विफल रहने के बाद जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई। वहीं पिछले रिकार्डों को देखते हुए शक और गहरा गया कि कहीं न कहीं जेल के किसी कर्मचारी ने पिस्टल, कारतूस और मैग्जीन पहुंचाई है। इसके साथ ही दो नंबर बैरक के ताले खोले, जिसमें सुमित बंद था। जेल प्रशासन दावा करता है कि जेल के अंदर कोई वस्तु नहीं आ सकती। तो पिस्टल, कारतूस और मैग्जीन कैसे अंदर पहुंची? इससे जेल प्रशासन स्वयं सवालों के घेरे में आ गया है। कौन कर्मचारी या अधिकारी शामिल है? या कितने लोग शामिल हैं? यह हकीकत तो अब जांच के बाद ही पता चलेगी।
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जिला कारगार में पकड़ा जा चुका है मोबाइल
करीब दो साल पहले जिला कारगार में डीएम-एसएसपी द्वारा संयुक्त चेकिंग अभियान चलाया गया था। उस समय एक बंदी के पास मोबाइल मिला था। वो बंदी स्पेशल बैरक में बंद था। बात करने के बाद बैरक में ही मोबाइल छिपा देता था। इस मामले में किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। बस इतनी कार्रवाई की गई कि उस बंदी की बैरक बदल दी गई।
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किस्मत का धनी था होमगार्ड
कुख्यात अपराधी देवकी नंदन उर्फ चंदन सिंह के खिलाफ 27 मुकदमें दर्ज हैं। कई मर्डर कर चुका है, उसके लिए गोली चलाना नई बात नहीं है। उसने जिला कारगार से भागने का प्रयास करते समय सीधे होमगार्ड श्यामलाल पर फायर किया था। वह तो श्यामलाल की किस्मत अच्छी थी कि फायर मिस हो गया। चंदन दूसरी गोली चलाने का प्रयास कर रहा था कि तब तक होमगार्ड पीछे की ओर भाग खड़ा हुआ और बच गया। उसने ही बंदी रक्षकों को इसकी जानकारी दी।
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10 मई को मुरादाबाद पेशी पर गया था सुमित
जिला कारागार से फरार हो चुका बंदी सुमित 10 मई को पेशी पर मुरादाबाद गया था। पुलिस को शक है कि कहीं न कहीं उसकी किसी से बात हुई। हो सकता है चंदन के परिवार वाले उससे मिलने मुरादाबाद पहुंचे हों और उनसे बातचीत के बाद यह प्लान बनाया गया हो। यह प्लान अकेले सुमित का नहीं है। पुलिस को यकीन है कि इसमें चंदन शामिल है और वही मुख्य साजिशकर्ता है।
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फरार बंदी की तलाश में तीन टीमें गठित
जिला जेल से फरार हुए बंदी सुमित को तलाश करने के लिए तीन टीमें लगाई गई हैं। एक टीम की सिविल लाइंस इंस्पेक्टर देवेश सिंह, दूसरी टीम की सदर कोतवाल ओमकार सिंह और तीसरी टीम की जिम्मेदारी एसओजी प्रभारी रामगोपाल शर्मा को दी गई है। तीनों टीमों ने बंदी की तलाश शुरू कर दी है। परंतु अब तक कोई सुराग नहीं लगा है।
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चंदन ने किया मौन धारण, कुछ नहीं उगला
जेल से फरार होने का प्रयास करते समय पकड़े गए देवकी नंदन उर्फ चंदन से सभी पुलिस अधिकारी और जेल प्रशासन पूछताछ कर चुका है लेकिन उसने अब तक अपना मुंह नहीं खोला है। उसने पुलिस को कुछ नहीं बताया है। लगातार पुलिस उससे पूछताछ करने में जुटी है।
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जेल की दीवार पर लगे तारों में नहीं दौड़ता करंट
जेल की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिहाज से दीवार के ऊपर खुले तार लगे हैं। कई साल पहले इन तारों में करंट दौड़ता था। परंतु अब यह तार करंट विहीन हैं। शनिवार रात अगर इन तारों में करंट दौड़ रहा होता तो शायद यह कदम उठाने से पहले बंदी दस बार सोचते।