करीब दो महीने पहले एक युवक की हत्या के मामले में नामजदों की गिरफ्तारी के बाद उसके परिवार की महिलाएं शुक्रवार को रिश्तेदारों के साथ अपने खेत में आलू खुदवाने पहुंची तो मृतक पक्ष के लोगों ने घेर लिया। आरोप है कि इन लोगों ने पहले घरों में तोड़फोड़ की फिर उन्हें मारपीट कर खेत से खदेड़ दिया। सूचना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची लेकिन आरोपी घरों पर नहीं मिले। महिलाओं में हत्यारोपियों की पत्नियों को कोतवाली आकर पुलिस की शरण लेनी पड़ी।
मामला कोतवाली क्षेत्र के गांव मीहलालनगला का है। गांव के रूपराम के बेटे श्रीकृष्ण की करीब दो महीना पहले मामूली कहासुनी के विवाद में हत्या कर दी गई थी। मृतक के भाई होतन ने संतोष, गजेंद्र, नन्हू और प्रताप को नामजद कराया था। पुलिस ने नामजदों को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया था। इसके बाद नामजदों के परिवार की महिलाएं गांव छोड़कर रिश्तेदारी में चली गईं थी। शुक्रवार को हत्यारोपियों की पत्नियां अगरवती, गुड्डी और बेगमवती अपनी वृद्ध सास रामश्री के साथ गांव पहुंचीं। उनके साथ रिश्तेदार भी थे। वे खेत में आलू की खुदाई को पहुंचीं तो मृतक पक्ष के लोगों को भनक लग गई। आरोप है कि मृतक पक्ष के लोगों ने पहले तो उनके घरों में तोड़फोड़ की फिर खेत से उन्हें मारपीट कर खदेड़ दिया।
मारपीट में बेगमवती और गुड्डी के चोट आई है। बाद में उन्होंने कोतवाली आकर शरण ली। वृद्धा रामश्री ने कोतवाली प्रभारी राजीव कुमार को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। पुलिस मीहलालनगला भी पहुंची लेकिन मारपीट करने वाले मृतक पक्ष के लोग घरों पर नहीं मिले। इधर, कोतवाली प्रभारी का कहना है कि किसी के घर में तोड़फोड़ नहीं हुई है। मृतक पक्ष के लोगों ने आलू खोदने से महिलाओं को रोका जरूर था। इधर, मृतक पक्ष के लोगों में अनेकपाल ने बताया कि किसी के साथ मारपीट नहीं की गई बल्कि हत्यारोपियों के परिवार की महिलाओं ने रिश्तेदारों को लाकर हंगामा किया। पुलिस आरोपों-प्रत्यारोपों की तहकीकात में जुट गई है।